प्रश्न 1.
आविन्यों क्या है और वह कहाँ अवस्थित है?
उत्तर –
आविन्यों एक पुराना शहर है 🌆। यह दक्षिण फ्रांस में रोन नदी के किनारे बसा हुआ है।
प्रश्न 2.
बरस आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है?
उत्तर –
हर गर्मियों में फ्रांस और यूरोप का एक बहुत प्रसिद्ध और रंग-बिरंगा 🎨 समारोह आविन्यों में आयोजित होता है।
प्रश्न 3.
लेखक आविन्यों किस सिलसिले में गए थे? वहाँ उन्होंने क्या देखा-सुना?
उत्तर –
लेखक को पीटर ब्रुक के विवादास्पद ‘महाभारत’ की पहली प्रस्तुति देखने का निमंत्रण मिला था। वहाँ उन्होंने देखा कि समारोह के दौरान कई चर्च और पुराने स्थल रंगस्थलियों 🎭 में बदल जाते हैं।
प्रश्न 4.
ला शबूज क्या है और वह कहाँ है? आजकल उसका क्या उपयोग होता है?
उत्तर –
यह एक किला 🏰 है, जिसे फ्रेंच शासकों ने पोप की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनवाया था। यह आविन्यों में स्थित है। आज इसमें कलाकेंद्र 🎨 स्थापित है और रंगमंच और लेखन के लिए इस्तेमाल होता है।
प्रश्न 5.
ला शत्रूज का स्थापत्य ‘मौन का स्थापत्य’ क्यों कहा गया?
उत्तर –
ला शत्रूज में काथूसियन सम्प्रदाय का ईसाई मठ है। इसके चैम्बर दो-दो कमरे वाले, चौदहवीं सदी के फर्नीचर से सुसज्जित हैं। सम्प्रदाय मौन में विश्वास करता है, इसलिए पूरा स्थापत्य मौन का प्रतीक है। इस कारण लेखक ने इसे ‘मौन का स्थापत्य’ कहा।
प्रश्न 6.
लेखक आविन्यों क्या लेकर गए थे और कितने दिनों तक रहे? उनकी उपलब्धि क्या रही?
उत्तर –
लेखक अपने साथ हिन्दी का टाइपराइटर, तीन-चार पुस्तकें 📚 और संगीत के टेप्स 🎵 लेकर गए। वे 24 अक्टूबर से 10 नवम्बर 1994 तक, कुल उन्नीस दिन वहां रहे। इस दौरान उन्होंने 35 कविताएँ और 27 गद्य रचनाएँ कीं। ✍️
प्रश्न 7.
‘प्रतीक्षा करते हैं पत्थर’ में कवि पत्थर का मानवीकरण क्यों करता है?
उत्तर –
कवि मौन साधना के प्रभाव में था। उसने प्रतीक्षा कर रहे पत्थर को भी मानवीकरण करके देखा, जैसे वे अपने इंतजार में धीरज से खड़े हों। 🪨
प्रश्न 8.
आविन्यों के प्रति लेखक का सम्मान कैसे दिखता है?
उत्तर –
लेखक आविन्यों को सुंदर, सुनसान और सघन बताते हैं। भय, पवित्रता और आसक्ति से भरी रातों और दिनों का वर्णन किया है। उनका मन वहाँ की स्मृति और अनुभवों के लिए गहरी कृतज्ञता से भरा है। 🙏
प्रश्न 9.
मनुष्य जीवन और पत्थर में समानता और विषमता क्या है?
उत्तर –
मनुष्य सुख-दुःख देखता है, पत्थर भी मौसम और समय के बदलते प्रभाव में रहता है। मनुष्य अपनी भावनाएँ व्यक्त करता है, पत्थर मौन रहता है। शब्दों की कविता और निःशब्द कविता की तरह। मानव झुककर नमन करता है, पत्थर बिना झुके प्रार्थना करता है। 🪨💫
प्रश्न 10.
कविता से क्या सीखते हैं?
उत्तर –
लक्ष्य के प्रति मौन रहकर कर्म करना और बाधाओं को सहन करते हुए लक्ष्य प्राप्त करना। 💪
प्रश्न 11.
नदी के तट पर लेखक को क्या अनुभव होता है?
उत्तर –
लेखक को लगता है कि जल स्थिर है, और तट ही बह रहा है। वे नदी के साथ बह रहे हैं, नदी में अपनी झलक देखते हैं। 🌊
प्रश्न 12.
नदी तट पर किसकी याद आती है और क्यों?
उत्तर –
विनोद कुमार शुक्ल की कविता याद आती है, क्योंकि लेखक अनुभव करते हैं कि वे स्वयं नदी हैं। 📝
प्रश्न 13.
नदी और कविता में समानता क्या है?
उत्तर –
जैसे नदी विभिन्न स्रोतों से जल लेकर सागर में मिलती है, वैसे ही कविता में विभिन्न शब्द और छवियाँ मिलकर बनी रहती हैं। दोनों अनवरत बहती रहती हैं और कभी खाली नहीं होतीं। 🌊📖
प्रश्न 14.
किसके पास तटस्थ रह पाना संभव नहीं?
उत्तर –
नदी और कविता के पास। वे सबको भिगोती और शामिल करती हैं।