संपूर्ण क्रांति (जयप्रकाश नारायण) — सम्पूर्ण, समझने लायक नोट्स
किस प्रसंग से लिया गया है?
- यह 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में दिया गया जयप्रकाश नारायण (जेपी) का ऐतिहासिक भाषण है।
- भाषण का निचोड़: सिर्फ सरकार बदलने की बात नहीं—समाज, राजनीति, शिक्षा, अर्थ, नैतिकता, संस्कृति और व्यक्ति-चरित्र तक में आमूल-परिवर्तन चाहिए। इसी समेकित परिवर्तन को जेपी ने “संपूर्ण क्रांति” कहा।
क्यों महत्वपूर्ण?
- युवाशक्ति को लोकतंत्र बचाने का आह्वान।
- भ्रष्टाचार/महँगाई/बेरोज़गारी/दमन के खिलाफ जन-आन्दोलन का नैतिक-लोकतांत्रिक रास्ता।
- नेतृत्व का मॉडल: सबकी सुनना, निर्णय एक—ताकि आंदोलन बिखरे नहीं।
जेपी—संक्षिप्त जीवन-परिचय
- जन्म: 11 अक्टूबर 1902, सिताबदियारा (बलिया–सारण सीमा)।
- बचपन/शिक्षा: प्रारम्भिक शिक्षा घर पर; फिर पटना कॉलेजिएट स्कूल; असहयोग में पढ़ाई छोड़ी; 1922 में अमेरिका गए—Berkeley/ Wisconsin–Madison आदि में उच्च शिक्षा; मजदूरी करते हुए पढ़े; मार्क्सवाद/समाजवाद का गहरा अध्ययन।
- स्वदेश वापसी: माँ की अस्वस्थता के कारण पीएचडी नहीं कर सके; 1929 में कांग्रेस में; ‘कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी’ के सूत्रधार; 1942 के आंदोलन में अग्रिम पंक्ति; कई बार जेल।
- स्वतंत्रता के बाद: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी; 1954 से सर्वोदय/ग्राम-स्वराज; 1965 में मैग्सेसे पुरस्कार; 1974—बिहार छात्र आंदोलन और “संपूर्ण क्रांति” का नारा।
- निधन: 8 अक्टूबर 1979; मरणोपरान्त भारत रत्न—1999।
संपूर्ण क्रांति—मुख्य आयाम (7 धाराएँ)
- राजनीतिक: स्वच्छ चुनाव, जवाबदेही, दमन-रहित शासन
- सामाजिक: छुआछूत/जातिगत अन्याय/लैंगिक विषमता का अंत
- आर्थिक: भ्रष्टाचार-रोधी नीति, जन-कल्याण, स्थानीय स्वावलंबन
- शैक्षिक: रोजगार-उन्मुख, मानवीय मूल्य-आधारित शिक्षा
- सांस्कृतिक: लोक-मानस और नैतिकता का उत्थान
- नैतिक: सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी
- आध्यात्मिक/व्यक्तिगत: आत्म-अनुशासन, चरित्र-निर्माण
नेतृत्व पर जेपी का फ़ॉर्मूला (भाषण का दिल)
- “सबकी सुनूँगा, खासकर छात्रों की; पर अंतिम फैसला मेरा होगा—और सब मानेंगे।”
- क्यों? बंटे हुए नेतृत्व से आंदोलन दिशाहीन और कमजोर हो जाता है।
अमेरिका प्रवास—कठिनाई और सीख
- मजदूरी करते हुए पढ़ाई: खेतों/कारखानों/होटलों में काम; एक रजाई में दो-दो छात्र—कठोर परिश्रम।
- वैचारिक गहराई: मार्क्सवाद/समाजवाद के स्रोतों से सीधी मुलाकात; पर भारत लौटकर कांग्रेस में—क्योंकि दास देश में आज़ादी की लड़ाई से अलग नहीं रहा जा सकता (लेनिन-प्रेरित तर्क)।
लोकतंत्र का दुश्मन कौन?
- जेपी का साफ़ कथन: जो जनता के शांतिपूर्ण कार्यक्रमों को दबाएँ—लाठी/गिरफ्तारी/रोध—वे “डेमोक्रेसी” के दुश्मन हैं।
व्यक्ति नहीं—नीति से मतभेद
- इन्दिरा जी हों या कोई और—झगड़ा व्यक्ति से नहीं; गलत नीति/सिद्धान्त/कार्यों से है—यह लोकतांत्रिक असहमति है, दुश्मनी नहीं।
बापू–नेहरू के बारे में जेपी
- बापू की महानता: असहमति सुनते थे, प्रेम से समझाते थे।
- नेहरू का बड़प्पन: आदर–प्रेम बने रहते हुए भी जेपी उनकी तीखी आलोचना कर पाते थे; प्रमुख मतभेद—विदेश नीति पर।
भ्रष्टाचार की जड़—जेपी का निदान
- गलत नीतियाँ, अकर्मण्यता, रिश्वत-तंत्र, तंत्र की निरंकुशता—जन-जीवन का काम बगैर “रिश्वत” नहीं; शिक्षा से दफ्तर तक।
- उपाय: लोककल्याणकारी नीति, नागरिक निगरानी, जन-भागीदारी, पारदर्शी व्यवस्था।
दलविहीन लोकतंत्र और साम्यवाद—संबंध
- सर्वोदय की कल्पना: ग्राम-आधारित, दलविहीन प्रतिनिधित्व।
- मार्क्सवाद का लक्ष्य: राज्य का क्षय—अंततः “स्टेटलेस सोसायटी”; जेपी कहते हैं—सच्चा लोकतंत्र वहीं फलेगा; वह निश्चय ही दलविहीन होगा।
संघर्ष समितियों से अपेक्षाएँ (जेपी का कार्यक्रम)
- मिलकर उम्मीदवार तय करें/समर्थन दें; चुनाव के बाद प्रतिनिधियों की निगरानी करें।
- प्रतिनिधि भटके तो इस्तीफे तक बाध्य करें।
- सिर्फ शासन से नहीं—समाज के हर अन्याय/अनीति से लड़ें: घूसखोरी, फर्जी बंदोबस्ती, गाँवों के अन्याय—सब पर कार्रवाई।
- स्थायी, जन-उत्तरदायी, गैर-दलीय नागरिक मंच बनें।
चुनाव-सुधार—जेपी के सुझाव (सार)
- चुनाव खर्च घटे; गरीब उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़े; पारदर्शी मतदान; उम्मीदवार-चयन में जनता की वास्तविक भूमिका; जन-प्रतिनिधियों पर निरंतर जन-अंकुश।
दिनकर जी की मृत्यु—भाषण का प्रसंग
- उसी दिन जेपी से मिले; रात को रामनाथ गोयनका (इंडियन एक्सप्रेस) के यहाँ ठहरे; रात में दिल का दौरा; अस्पताल पहुँचने पर भी बच न सके—उसी रात देहांत।
मेरी पसंद का अंश—क्यों असरदार?
- जेपी का अमेरिका-वाला श्रम–संघर्ष प्रसंग: “एक रजाई—दो छात्र; बर्तन धोना/जूते पॉलिश; पढ़ाई नहीं छोड़ी”—यह युवाओं के लिए समर्पण का जीवित पाठ है।
छोटी सुधार-नोट
- Wisconsin (विस्कॉन्सिन)–Madison;
- भारत रत्न—मरणोपरान्त 1999 (अक्सर 1998 लिखा मिलता है, पर सरकारी सूची में 1999 है)।
पाठ्य-प्रश्नों के मॉडल उत्तर (संक्षेप, बोर्ड-स्टाइल)
- नेतृत्व पर जेपी के विचार
- सबकी सुनवाई, बहस, संवाद; अंतिम निर्णय एक—अनुशासन/एकजुटता के लिए; तभी क्रांति सफल।
- छात्र-जीवन/अमेरिका प्रवास—प्रभावकारी बातें
- असहयोग में पढ़ाई छोड़ी; बिहार विद्यापीठ से परीक्षा; 1922 में अमेरिका; मजदूरी करते हुए उच्च-शिक्षा; मार्क्स/समाजवाद का अध्ययन; आत्मनिर्भरता/कठोर परिश्रम।
- कम्युनिस्ट पार्टी में क्यों नहीं गए?
- गुलाम देश में कम्युनिस्टों को आज़ादी की लड़ाई से अलग नहीं रहना चाहिए—यह लेनिन से सीखा; इसलिए कांग्रेस के अंतर्गत स्वतंत्रता-संग्राम में शामिल हुए।
प्रसंग-व्याख्या
(क) “डेमोक्रेसी का दुश्मन…”—शांतिपूर्ण जन-कार्यक्रमों पर दमन शासन की अलोकतांत्रिकता है; जनता-सम्मान ही लोकतंत्र की आत्मा।
(ख) “व्यक्ति से नहीं…”—नीति/सिद्धान्त/कार्य से असहमति; लोकतंत्र में आलोचना व्यक्ति-विमुख नहीं, मुद्दा-केंद्रित होनी चाहिए।बापू और नेहरू—जेपी ने क्या रेखांकित किया?
- बापू: सहिष्णुता, संवाद; नेहरू: बड़प्पन—कटु आलोचना भी सुनी; मतभेद—विदेश नीति पर, पर आपसी सम्मान अक्षुण्ण।
- भ्रष्टाचार की जड़/उपाय
- जड़: गलत नीतियाँ, दमनकारी तंत्र, रिश्वत-प्रथा; उपाय: नीति-सुधार, पारदर्शिता, जन-निगरानी, वोटर-निर्णय पर जन-अंकुश।
- दलविहीन लोकतंत्र–साम्यवाद का सम्बन्ध
- सर्वोदय का आदर्श और मार्क्स का स्टेटलेस सोसायटी—दोनों सत्ता-केंद्र के क्षय और जन-सत्ता की प्रबलता की ओर—जहाँ दलीय वर्चस्व की जरूरत नहीं।
- संघर्ष समितियों से अपेक्षाएँ
- उम्मीदवार-चयन/समर्थन; जन-प्रतिनिधियों का उत्तरदायित्व सुनिश्चित; घूस/फर्जीवाड़ा/गाँव-अन्याय पर कार्रवाई; स्थायी जन-मंच।
- प्रिय अंश और प्रभाव
- जेपी का परिश्रम-प्रसंग—युवाओं के लिए प्रेरणा; शिक्षा/संघर्ष/आत्मनिर्भरता का जीवित उदाहरण।
- चुनाव सुधार—कितना सहमत?
- पूरी सहमति: खर्च घटे, पारदर्शिता/जन-अंकुश बढ़े—तभी लोकतंत्र अर्थपूर्ण।
- दिनकर जी—निधन-परिस्थितियाँ
- जेपी से मिलकर लौटे; रात को दिल का दौरा; तत्काल चिकित्सा के बावजूद देहांत—समकालीन साहित्य का बड़ा क्षय।
वस्तुनिष्ठ (MCQ — 20) उत्तर अंत में
- जेपी का जन्म?
A) 11 अक्तूबर 1902 B) 14 नवम्बर 1907 C) 10 मार्च 1935 D) 10 सितम्बर 1910 - जेपी की पत्नी—
A) दमयंती देवी B) प्रभावती देवी C) लक्ष्मी देवी D) शोभा देवी - प्रभावती—किसकी पुत्री?
A) ब्रजकिशोर प्रसाद B) राधारमण C) देवकुमार D) शशिधर - प्रारम्भिक शिक्षा—
A) घर पर B) स्कूल C) कॉलेज D) ननिहाल - पहला दाख़िला—
A) पटना कॉलेजिएट B) मिलर हाईस्कूल C) दयानंद हाईस्कूल D) मुस्लिम हाईस्कूल - जेपी अमेरिका गए—
A) 1919 B) 1922 C) 1925 D) 1930 - अमेरिका में जेपी ने मुख्यतः क्या किया?
A) खेती सीखी B) उच्च शिक्षा ली C) व्यापार किया D) सेना जॉइन की - जेपी को कौन-सा वैचारिक प्रभाव गहरा पड़ा?
A) अराजकतावाद B) जैन धर्म C) मार्क्सवाद/समाजवाद D) प्राचीन ग्रीक दर्शन - जेपी को समाज-सेवा के लिए पुरस्कार—
A) ज्ञानपीठ B) नोबेल C) मैग्सेसे D) पद्म विभूषण - “लोकनायक” किसे कहा गया?
A) नेहरू B) पटेल C) जेपी D) लोहिया - “संपूर्ण क्रांति” का भाषण—
A) 15 अगस्त 1947 B) 26 जनवरी 1950 C) 5 जून 1974 D) 25 जून 1975 - जेपी किससे असहमत रहते थे?
A) बापू से B) नेहरू से—विदेश नीति पर C) लाला लाजपत राय से D) सरदार पटेल से - जेपी ने किसके साथ मित्रता को “ठोस” कहा?
A) जेल के दिनों की B) अंडरग्राउंड जमाने की C) कॉलेज की D) गाँव की - दिनकर जी की मृत्यु का कारण—
A) सड़क दुर्घटना B) हृदयाघात C) कैंसर D) निमोनिया - जेपी का पुकार का नाम—
A) बाडल B) बाबू C) नन्दू D) मनु - जेपी ने किसको लोकतंत्र का दुश्मन कहा?
A) विपक्ष B) प्रेस C) शांतिपूर्ण कार्यक्रमों पर दमन करने वाले D) विद्यार्थी - दलविहीन लोकतंत्र—किस धारा से जुड़ा?
A) सर्वोदय B) उपनिषद C) चार्वाक D) अस्तित्ववाद - जेपी का देहावसान—
A) 1974 B) 1975 C) 1977 D) 1979 - जेपी को भारत रत्न—(मरणोपरान्त)
A) 1996 B) 1998 C) 1999 D) 2001 - “यूथ फॉर डेमोक्रेसी”—किसने कहा?
A) पटेल B) जेपी C) लोहिया D) विनोबा
उत्तर-संकेत: 1-A, 2-B, 3-A, 4-A, 5-A, 6-B, 7-B, 8-C, 9-C, 10-C, 11-C, 12-B, 13-B, 14-B, 15-A, 16-C, 17-A, 18-D, 19-C, 20-B
रिक्त स्थान (12)
- जेपी की प्रारम्भिक शिक्षा … पर हुई। — घर
- “बिहार में हिन्दी की वर्तमान स्थिति” पर जेपी को … पुरस्कार मिला। — सर्वोच्च
- अमेरिका में …, बर्कले, Wisconsin–Madison आदि में … ग्रहण की। — कैलिफोर्निया; उच्च शिक्षा
- अमेरिका में जेपी ने मार्क्सवाद और … की शिक्षा ग्रहण की। — समाजवाद
- जेपी माँ की … के कारण पीएचडी नहीं कर सके। — अस्वस्थता
- जेपी का पुकार का नाम … था। — बाडल
- “यूथ फॉर …” का आह्वान जेपी ने किया। — डेमोक्रेसी
- अंडरग्राउंड जमाने की … को जेपी ने ठोस माना। — मित्रता
- जेपी ने … पार्टी में नहीं गए—कांग्रेस में शामिल हुए। — कम्युनिस्ट
- लोकतंत्र का दुश्मन—शांतिमय कार्यक्रमों पर … करने वाले। — दमन
- दिनकर जी की मृत्यु … से हुई। — दिल का दौरा
- संघर्ष समितियाँ … उम्मीदवार तय करने में मदद करेंगी। — जन-समर्थित
सत्य/असत्य (10)
- “संपूर्ण क्रांति” केवल सरकार बदलने की माँग थी। — असत्य
- जेपी ने युवाओं से लोकतंत्र बचाने का आह्वान किया। — सत्य
- जेपी का मतभेद व्यक्ति से था, नीति से नहीं। — असत्य (व्यक्ति से नहीं, नीति से था)
- जेपी ने अमेरिका में मजदूरी करते हुए पढ़ाई की। — सत्य
- जेपी ने कम्युनिस्ट पार्टी जॉइन की थी। — असत्य
- जेपी ने दलविहीन लोकतंत्र की बात भी उठाई। — सत्य
- दिनकर जी का देहांत सड़क दुर्घटना में हुआ। — असत्य
- जेपी को मैग्सेसे पुरस्कार मिला। — सत्य
- “लोकनायक” उपाधि राममनोहर लोहिया को मिली। — असत्य
- भारत रत्न जेपी को मरणोपरान्त मिला। — सत्य
मिलान (10)
A) लोकनायक — (6) जेपी
B) प्रभावती — (5) ब्रजकिशोर प्रसाद की पुत्री
C) 5 जून 1974 — (7) गांधी मैदान, पटना—ऐतिहासिक भाषण
D) मैग्सेसे — (1) 1965—समाज-सेवा
E) अंडरग्राउंड — (9) ठोस मित्रता का समय
F) दलविहीन लोकतंत्र — (3) सर्वोदय-आधारित विचार
G) मार्क्सवाद/समाजवाद — (2) वैचारिक प्रभाव (अमेरिका)
H) भ्रष्टाचार — (10) गलत नीतियों/रिश्वत-तंत्र की पैदाइश
I) संघर्ष समितियाँ — (8) जन-निगरानी/उम्मीदवार-चयन
J) 1979 — (4) जेपी का देहावसान
“भाषा की बात” — अभ्यास
- अंग्रेज़ी शब्द और हिन्दी पर्याय
- Indian Express — अख़बार का नाम
- Doctor — चिकित्सक
- Youth — युवा
- Democracy — लोकतंत्र
- Laboratory — प्रयोगशाला
- Dictate — निर्देश/बताना
- Assistant — सहायक
- Non-gazetted — गैर-राजपत्रित
- Diversion — रुकावट/अवरोध
- Underground — भूमिगत
- University — विश्वविद्यालय
- Restaurant — उपहारगृह/होटल
- Department — विभाग
- I.S.C. — इंटरमीडिएट (विज्ञान)
- Revenue Assistant — सहायक राजस्व अधिकारी
- सर्वनाम पहचान (भेद सहित)
- “जो, मैंने, आपसे, वह” — पुरुषवाचक/सम्बन्धवाचक
- “मुझे” — उत्तम पुरुषवाचक
- “मेरा, उनका” — पुरुषवाचक/सम्बन्धबोधक
- “मेरी, उन्होंने” — पुरुषवाचक
- शब्द से विशेषण बनाइए
- महत्ता → महत्त्वपूर्ण; गरीबी → गरीब; स्नेह → स्नेही; प्रेम → प्रेमी; शक्ति → शक्तिशाली; कानून → कानूनी; गाँव → ग्रामीण
- अव्यय छाँटिए
- लेकिन, और, तो, अभी, कितने — अव्यय
- टूटी संरचना—व्यवस्थित वाक्य
- बेरोज़गारी दिन पर दिन बढ़ती जाती है।
- रात को दिल का दौरा पड़ा; गोयनका जी ने तीन मिनट में अस्पताल पहुँचाया।
- शायद उसे ‘विलिंगडन नर्सिंग होम’ कहते हैं।
- असहयोग के बाद मेरा जीवन करीब डेढ़ वर्ष यूँ ही बीता।
- मुझे कितनी गालियाँ दी गई हैं!
बहुत छोटे उत्तर (10)
- जेपी किस नाम से प्रसिद्ध? — लोकनायक
- अमेरिका गए—कब? — 1922
- समाज-सेवा का पुरस्कार? — मैग्सेसे
- निधन—कब? — 8 अक्तूबर 1979
- मद्रास में किसके साथ रुके? — ईश्वर अय्यर
- दिनकर जी की मृत्यु का कारण? — दिल का दौरा
- देश का भविष्य—किसके हाथ? — नई पीढ़ी
- बिहार विद्यापीठ से कौन-सी परीक्षा? — I.A.
- विदेश से लौटकर कांग्रेस क्यों? — आज़ादी की लड़ाई में शामिल होना
- “ठोस” मित्रता—कौन-सी? — अंडरग्राउंड जमाने की
लंबे उत्तर—तेज़ लिखने का ढांचा (3–4 पंक्तियों में भी चलेगा)
- प्रस्तावना: संक्षेप में मुद्दा/थीसिस
- तर्क: पाठ-आधारित बिंदु/उद्धरण
- विश्लेषण: अर्थ/प्रासंगिकता
- निष्कर्ष: एक पंक्ति का “टेकअवे”
सार-संक्षेप (3–4 पंक्तियाँ)
- जेपी का 1974 का भाषण सिर्फ सत्ता-परिवर्तन नहीं, समाज-परिवर्तन का रोडमैप है—संपूर्ण क्रांति।
- युवाओं को लोकतंत्र की रक्षा में आगे आना चाहिए; शांतिपूर्ण, अनुशासित, नीति-केंद्रित संघर्ष जरूरी है।
- भ्रष्टाचार/महँगाई/अन्याय का मूल—गलत नीतियाँ; समाधान—लोककल्याणकारी नीति और जन-अंकुश।
- जेपी की नीति: व्यक्ति नहीं—नीति से मतभेद; संवाद, साहस, और वचन-निष्ठा—यही लोकतंत्र की आत्मा है।