बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान: अध्याय 12 - विद्युत (Electricity) - विस्तृत नोट्स
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बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान: अध्याय 12 - विद्युत (Electricity) - विस्तृत नोट्स
1. विद्युत धारा (Electric Current)
परिभाषा: विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं। आसान शब्दों में, किसी चालक (तार) में आवेश (electrons) का बहना विद्युत धारा है।
सूत्र (Formula): यदि किसी चालक से
t
समय में
Q
आवेश प्रवाहित होता है, तो:
I=tQ
जहाँ,
I
= विद्युत धारा
Q
= आवेश (Charge)
t
= समय (Time)
मात्रक (SI Unit): इसका मात्रक एम्पियर (Ampere - A) होता है।
1 एम्पियर की परिभाषा: यदि किसी चालक से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो, तो धारा 1 एम्पियर कहलाती है। (
1A=1C/1s
)
मापने वाला यंत्र: इसे अमीटर (Ammeter) से मापा जाता है। अमीटर को परिपथ में हमेशा श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है।
2. विद्युत विभव और विभवांतर (Electric Potential and Potential Difference)
विद्युत विभव: एकांक धन आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में जो कार्य किया जाता है, उसे उस बिंदु का विद्युत विभव कहते हैं।
विभवांतर (Potential Difference - V): एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर कहते हैं। यह "वोल्टेज" भी कहलाता है।
सूत्र (Formula):
V=QW
जहाँ,
V
= विभवांतर
W
= किया गया कार्य (Work done)
Q
= आवेश (Charge)
मात्रक (SI Unit): इसका मात्रक वोल्ट (Volt - V) होता है।
मापने वाला यंत्र: इसे वोल्टमीटर (Voltmeter) से मापा जाता है। इसे परिपथ में हमेशा पार्श्वक्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है।
🎨 [चित्र निर्देश 1: विद्युत परिपथ आरेख (Electric Circuit Diagram)]
(यह चित्र विद्युत धारा के प्रवाह को समझने के लिए है)
चित्र कैसे बनाएँ:
एक आयताकार (Rectangular) तार का ढांचा बनाएँ।
बैटरी: बाईं ओर बैटरी का चिह्न बनाएँ (एक लंबी लाइन और एक छोटी लाइन, लंबी लाइन +, छोटी लाइन -)।
कुंजी (Switch): नीचे की तरफ एक स्विच का चिह्न बनाएँ (दो कोष्ठक ( ) के बीच एक बिंदी •)।
बल्ब: ऊपर की तरफ एक बल्ब का चिह्न बनाएँ (M आकार का फिलामेंट जिसके ऊपर गोला हो)।
अमीटर: बल्ब के साथ लाइन में एक गोला बनाएँ और उसमें 'A' लिखें (यह श्रेणीक्रम है)।
दिशा: तीर (Arrow) का निशान बैटरी के (+) से (-) की ओर लगाएँ।
3. ओम का नियम (Ohm’s Law)
यह इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण नियम है।
नियम: "यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे- ताप, लंबाई) समान रहें, तो चालक के सिरों के बीच का विभवांतर (
V
) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (
I
) के समानुपाती होता है।"
गणितीय रूप:
V∝I
V=I×R
जहाँ,
R
एक नियतांक है जिसे चालक का प्रतिरोध (Resistance) कहते हैं।
🎨 [चित्र निर्देश 2: ओम के नियम का सत्यापन और ग्राफ]
(A) परिपथ (Circuit):
एक बैटरी, एक स्विच, एक अमीटर और एक प्रतिरोध तार (Resistor - जिग-जैग लाइन) को एक आयत में जोड़ें।
प्रतिरोध तार (Resistor) के ठीक ऊपर और नीचे तार जोड़कर एक वोल्टमीटर (V) लगाएँ (यह समानांतर क्रम है)।
(B) ग्राफ (V-I Graph):
एक ग्राफ बनाएँ। X-अक्ष (नीचे वाली लाइन) पर धारा (I) लिखें।
Y-अक्ष (खड़ी लाइन) पर विभवांतर (V) लिखें।
मूल बिंदु (0) से शुरू होकर एक सीधी तिरछी रेखा (Straight Line) खींचें। यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे वोल्टेज बढ़ता है, धारा भी बढ़ती है।
4. प्रतिरोध (Resistance)
परिभाषा: चालक का वह गुण जो अपने अंदर से बहने वाली धारा का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है।
मात्रक: ओम (
Ω
- Ohm)।
1 ओम = 1 वोल्ट / 1 एम्पियर।
प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक:
किसी चालक का प्रतिरोध निम्न बातों पर निर्भर करता है:
चालक की लंबाई (
l
): तार जितना लंबा होगा, प्रतिरोध उतना ही अधिक होगा। (
R∝l
)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (
A
): तार जितना मोटा होगा, प्रतिरोध उतना ही कम होगा। (
R∝1/A
)
पदार्थ की प्रकृति: तांबे का प्रतिरोध कम होता है, लोहे का ज्यादा।
प्रतिरोधकता (Resistivity -
ρ
):
R=ρAl
यहाँ
ρ
(रो) वैधता प्रतिरोधकता है। इसका मात्रक ओम-मीटर (
Ωm
) है।
5. प्रतिरोधकों का संयोजन (Combination of Resistors)
प्रतिरोधों को दो प्रकार से जोड़ा जा सकता है:
(A) श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)
जब प्रतिरोधों को एक के बाद एक (सिरे से सिरा मिलाकर) जोड़ा जाता है।
इसमें सभी प्रतिरोधों में विद्युत धारा (I) समान रहती है।
कुल प्रतिरोध (
Rs
) का मान सबसे अधिक होता है।
सूत्र:
Rs=R1+R2+R3
🎨 [चित्र निर्देश - श्रेणीक्रम]:
एक सीधी क्षैतिज रेखा (Horizontal line) खींचें।
इस लाइन पर तीन जिग-जैग (पहाड़ जैसी) आकृतियाँ बनाएँ। उन्हें
R1
,
R2
,
R3
नाम दें।
इस पूरी लाइन को बैटरी और स्विच से जोड़ दें।
(B) पार्श्वक्रम या समानांतर संयोजन (Parallel Combination)
जब सभी प्रतिरोधों के एक सिरे एक बिंदु पर और दूसरे सिरे दूसरे बिंदु पर जुड़े हों।
इसमें सभी प्रतिरोधों के सिरों पर विभवांतर (V) समान रहता है।
कुल प्रतिरोध (
Rp
) का मान घट जाता है।
सूत्र:
Rp1=R11+R21+R31
🎨 [चित्र निर्देश - पार्श्वक्रम]:
तीन जिग-जैग प्रतिरोधों को एक के ऊपर एक (सीढ़ी की तरह) बनाएँ।
तीनों के बाईं ओर के सिरों को एक बिंदु A पर मिला दें।
तीनों के दाईं ओर के सिरों को एक बिंदु B पर मिला दें।
बिंदु A और B से तार निकालकर बैटरी से जोड़ दें।
6. विद्युत धारा का तापीय प्रभाव (Heating Effect of Electric Current)
जब किसी प्रतिरोध (जैसे हीटर का तार) से विद्युत धारा बहती है, तो वह गर्म हो जाता है। इसे तापीय प्रभाव कहते हैं।
जूल का तापन नियम (Joule’s Law of Heating): उत्पन्न ऊष्मा (
H
) निम्न बातों पर निर्भर करती है:
धारा के वर्ग के अनुक्रमानुपाती (
H∝I2
)
प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती (
H∝R
)
समय के अनुक्रमानुपाती (
H∝t
)
सूत्र:
H=I2Rt
(मात्रक: जूल)
व्यावहारिक अनुप्रयोग:
विद्युत बल्ब: इसका फिलामेंट टंगस्टन (Tungsten) का बना होता है क्योंकि इसका गलनांक बहुत उच्च (
3380∘C
) होता है।
विद्युत फ्यूज: यह एक सुरक्षा युक्ति है जो कम गलनांक वाले तार (टिन-लेड मिश्रधातु) से बना होता है। शॉर्ट सर्किट होने पर यह पिघलकर टूट जाता है।
7. विद्युत शक्ति (Electric Power)
कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर विद्युत शक्ति कहलाती है।
सूत्र:
P=V×I
या
P=I2R
या
P=RV2
मात्रक (SI Unit):वाट (Watt - W)।
ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक (Commercial Unit of Energy): घरों में बिजली बिल के लिए 'यूनिट' का उपयोग होता है।