वे स्रोत जिनका उपयोग हाल ही में तकनीक के विकास के साथ शुरू हुआ है। जैसे- सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, नाभिकीय ऊर्जा, महासागरीय ऊर्जा।
3. जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels)
करोड़ों वर्षों तक पृथ्वी की सतह के नीचे दबे हुए पौधों और जानवरों के अवशेषों के विघटन से जो ईंधन बना, उसे जीवाश्म ईंधन कहते हैं।
उदाहरण: कोयला (Coal), पेट्रोलियम (Petroleum), प्राकृतिक गैस।
हानियाँ:
यह अनवीकरणीय (Non-renewable) है, यानी एक बार खत्म होने पर दोबारा बनने में करोड़ों साल लगेंगे।
जलने पर कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर के ऑक्साइड छोड़ता है जिससे अम्लीय वर्षा (Acid Rain) होती है।
ग्रीनहाउस गैस (
CO2
) उत्पन्न करता है जिससे ग्लोबल वार्मिंग होती है।
4. तापीय विद्युत संयंत्र (Thermal Power Plant)
यहाँ जीवाश्म ईंधन (कोयला) को जलाकर पानी को भाप (Steam) में बदला जाता है। यह भाप टर्बाइन को घुमाती है, जिससे विद्युत जनित्र (Generator) बिजली बनाता है।
इसे 'तापीय' इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें ईंधन को जलाकर उष्मा (Heat) उत्पन्न की जाती है।
ये संयंत्र प्रायः कोयले या तेल क्षेत्रों के पास बनाए जाते हैं ताकि परिवहन का खर्च बचे।
5. जल विद्युत संयंत्र (Hydro Power Plant)
यह ऊर्जा का एक पारंपरिक नवीकरणीय स्रोत है। इसमें गिरते हुए पानी की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
कार्यविधि: नदियों पर बड़े-बड़े बाँध (Dams) बनाए जाते हैं। बाँध में पानी इकट्ठा होता है (ऊँचाई पर)। जब यह पानी पाइपों के जरिए नीचे टर्बाइन के पंखों पर गिरता है, तो टर्बाइन घूमती है और बिजली बनती है।
लाभ: प्रदूषण मुक्त, नवीकरणीय (बारिश से पानी फिर भर जाता है), बाढ़ नियंत्रण।
हानियाँ: बड़े क्षेत्रों का डूबना, पेड़-पौधों का सड़कर मीथेन गैस बनाना, लोगों का विस्थापन (Displacement)।
🎨 [चित्र निर्देश 1: जल विद्युत संयंत्र]
(यह चित्र परीक्षा में पूछा जा सकता है)
बाँध की दीवार: कॉपी के बाईं ओर एक ऊँची, मोटी दीवार बनाएँ जो नीचे से चौड़ी और ऊपर से पतली हो (trapezoid shape)।
जलाशय: दीवार के पीछे (बाईं ओर) पानी भरा हुआ दिखाएँ। पानी की सतह ऊँची रखें।
गेट (Sluice Gate): दीवार के बीच में एक छोटा गेट बनाएँ जिससे पानी निकल सके।
पेनस्टॉक (Penstock): गेट से नीचे की ओर एक मोटा पाइप (Penstock) लाएँ जो ढलान के साथ नीचे जाए।
टर्बाइन: पाइप के निचले सिरे पर एक पंखा (Turbine) बनाएँ।
जनित्र: पंखे के ठीक ऊपर एक बॉक्स (Generator) बनाएँ और उससे बिजली के तार (Power lines) निकलते हुए दिखाएँ।
नदी: टर्बाइन से टकराने के बाद पानी को आगे नदी में बहते हुए दिखाएँ।
6. जैव मात्रा (Biomass) और बायोगैस (Biogas)
जैव मात्रा: वनस्पति और जंतुओं के अवशेष (जैसे लकड़ी, गोबर, सूखे पत्ते, फसलों के डंठल) को जैव मात्रा कहते हैं।
बायोगैस (जैव गैस): जब गाय के गोबर, फसलों के अवशेष और सब्जियों के कचरे को ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सड़ाया जाता है, तो बायोगैस बनती है।
मुख्य घटक: मीथेन (Methane -
CH4
) - 75%।
लाभ: यह धुआं रहित जलती है, इसकी तापन क्षमता उच्च है, और बचा हुआ कचरा (Slurry) उत्तम खाद का काम करता है।
🎨 [चित्र निर्देश 2: बायोगैस संयंत्र (Fixed Dome Type)]
(यह सबसे महत्वपूर्ण चित्र है)
जमीन: एक क्षैतिज रेखा (Horizontal line) खींचें जो जमीन की सतह है।
डाइजेस्टर टैंक (Digester Tank): जमीन के नीचे ईंटों का बना एक बड़ा गुंबद (Dome) जैसा टैंक बनाएँ। यह उल्टे कटोरे जैसा दिखता है।
मिश्रण टैंक (Mixing Tank): जमीन के ऊपर बाईं ओर एक छोटा चौकोर टैंक बनाएँ। यहाँ से एक पाइप नीचे डाइजेस्टर टैंक के निचले हिस्से में जोड़ें। इसमें 'गोबर + जल' का घोल दिखाया जाता है।
निकास टैंक (Overflow Tank): जमीन के ऊपर दाईं ओर एक और चौकोर टैंक बनाएँ। डाइजेस्टर टैंक के दूसरी तरफ से एक पाइप निकालकर इस निकास टैंक से जोड़ें। यहाँ से 'खाद (Slurry)' बाहर निकलती है।
गैस निकास: गुंबद के बिल्कुल ऊपर (शिखर पर) एक पतला पाइप लगाएँ और उसमें एक वाल्व (Valve) बनाएँ। यहाँ से गैस बाहर निकलती है।
लेबलिंग: बाईं ओर 'स्लरी (Slurry)', बीच में 'गैस टैंक', और ऊपर 'गैस निर्गम' लिखें।
7. पवन ऊर्जा (Wind Energy)
बहती हुई हवा (पवन) की गतिज ऊर्जा का उपयोग टर्बाइन घुमाने में किया जाता है।
पवन चक्की (Windmill): इसमें बड़े-बड़े पंखे होते हैं।
शर्तें: पवन चक्की चलाने के लिए हवा की गति कम से कम 15 km/h होनी चाहिए।
डेनमार्क को 'पवनों का देश' कहा जाता है।
8. सौर ऊर्जा (Solar Energy)
सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा।
सौर कुकर (Solar Cooker):
यह सूर्य की उष्मा को इकट्ठा करके खाना पकाता है।
काला रंग: बॉक्स के अंदर काला रंग पुता होता है क्योंकि काला रंग उष्मा को सबसे ज्यादा सोखता है।
कांच की शीट: बॉक्स के ऊपर कांच का ढक्कन होता है जो 'ग्रीनहाउस प्रभाव' पैदा करता है (उष्मा अंदर तो आती है पर बाहर नहीं जा पाती)।
दर्पण (Mirror): एक समतल दर्पण लगा होता है जो सूर्य की किरणों को बॉक्स के अंदर परावर्तित (Reflect) करता है।
बॉक्स: एक घनाभ (Cuboid) बॉक्स बनाएँ जैसे जूते का डिब्बा होता है।
अंदर का हिस्सा: बॉक्स के अंदर के हिस्से को काला रंग (पेंसिल से शेड) कर दें। बीच में एक बर्तन रखें।
कांच का ढक्कन: बॉक्स के मुंह पर एक पारदर्शी कांच की प्लेट लगी हुई दिखाएँ।
परावर्तक दर्पण: बॉक्स के ढक्कन से जुड़ा हुआ एक और ढक्कन (फ्लैप) खोलें जिसमें दर्पण (Mirror) लगा हो।
किरणें: सूर्य बनाएँ और उससे किरणें दर्पण पर टकराकर बॉक्स के अंदर जाती हुई दिखाएँ।
9. समुद्रों से ऊर्जा (Energy from Sea)
ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy): समुद्र में ज्वार-भाटा (पानी का ऊपर उठना और गिरना) से टर्बाइन घुमाकर बिजली बनाई जाती है।
तरंग ऊर्जा (Wave Energy): समुद्र की लहरों की गतिज ऊर्जा का उपयोग होता है।
महासागरीय तापीय ऊर्जा (OTEC): समुद्र की ऊपरी सतह (गर्म) और गहराई (ठंडी) के तापमान में अंतर (कम से कम
20∘C
) का उपयोग करके अमोनिया जैसे द्रव को उबाला जाता है, जिसकी भाप से जनित्र चलता है।
10. भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy)
पृथ्वी के अंदर का मैग्मा जब चट्टानों के बीच फंस जाता है, तो वह 'तप्त स्थल' (Hot spots) बनाता है। जब भूमिगत जल इन स्थलों के संपर्क में आता है, तो भाप बनती है। इस भाप को पाइपों द्वारा निकालकर टर्बाइन घुमाई जाती है।
स्थान: न्यूजीलैंड और अमेरिका में इसके कई संयंत्र हैं। भारत में मणिकरण (हिमाचल प्रदेश) में है।
11. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)
यह ऊर्जा परमाणु के नाभिक से प्राप्त होती है। अल्बर्ट आइंस्टीन के समीकरण
E=Δmc2
के अनुसार द्रव्यमान ऊर्जा में बदलता है।
दो प्रक्रियाएँ होती हैं:
नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission):
जब यूरेनियम (U-235), प्लूटोनियम या थोरियम जैसे भारी परमाणु पर कम ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है, तो वह हल्के नाभिकों में टूट जाता है और विशाल मात्रा में ऊर्जा निकलती है।
परमाणु बम और परमाणु बिजली घर (Nuclear Reactor) इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।
नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion):
जब दो हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन) जुड़कर एक भारी नाभिक (हीलियम) बनाते हैं।
सूर्य और तारों की ऊर्जा का स्रोत यही नाभिकीय संलयन है। इसे धरती पर नियंत्रित करना बहुत कठिन है।
🎨 [चित्र निर्देश 4: नाभिकीय रिएक्टर की रूपरेखा]
(यह थोड़ा जटिल है, लेकिन ब्लॉक डायग्राम बनाएँ)
रिएक्टर कोर: बाईं ओर एक मजबूत कंक्रीट का चैंबर बनाएँ। इसके अंदर कुछ छड़ें (Rods) खड़ी दिखाएँ जो ईंधन छड़ें (Fuel rods) हैं।
नियंत्रक छड़ें: ईंधन छड़ों के बीच में कुछ और छड़ें (Control rods - कैडमियम की) दिखाएँ जिन्हें ऊपर-नीचे किया जा सके।
हीट एक्सचेंजर: रिएक्टर से पाइप निकालकर एक पानी के टैंक (Heat Exchanger) में ले जाएँ (जहाँ पानी भाप बने)।
टर्बाइन और जनित्र: भाप वाले पाइप को आगे एक पंखे (Turbine) पर ले जाएँ और उसे जनित्र (Generator) से जोड़ें।
कूलिंग टावर: भाप को ठंडा करके वापस पानी बनाने के लिए एक और चैंबर नीचे बनाएँ।
12. ऊर्जा संकट और पर्यावरण (Environmental Consequences)
ऊर्जा का कोई भी स्रोत पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं है।
जीवाश्म ईंधन वायु प्रदूषण फैलाते हैं।
सौर सेल प्रदूषण मुक्त हैं लेकिन महंगे हैं।
नाभिकीय ऊर्जा से रेडियोधर्मी विकिरण (Radiation) का खतरा रहता है।
सतत विकास (Sustainable Development): हमें ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों (सौर, पवन, जल) पर अधिक निर्भर होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन बचे रहें और पर्यावरण सुरक्षित रहे।