सीमित मात्रा: पृथ्वी पर संसाधन (जैसे कोयला, पेट्रोल) सीमित हैं। यदि हम इनका अंधाधुंध उपयोग करेंगे, तो ये शीघ्र समाप्त हो जाएंगे।
लंबी अवधि: इन्हें बनने में लाखों-करोड़ों वर्ष लगते हैं।
समान वितरण: संसाधनों का वितरण अमीर और गरीब सभी में समान रूप से होना चाहिए, न कि केवल मुट्ठी भर अमीरों के पास।
पर्यावरण सुरक्षा: संसाधनों के दोहन से पर्यावरण को नुकसान (प्रदूषण) पहुँचता है, जिसे प्रबंधन द्वारा कम किया जा सकता है।
2. 5 R का सिद्धांत (The 5 R's Mantra)
पर्यावरण को बचाने के लिए 5 मंत्र दिए गए हैं:
इंकार (Refuse): जिन चीजों की आपको जरूरत नहीं है, उन्हें लेने से मना करें। (जैसे- दुकानदार से प्लास्टिक की थैली लेने से मना करना)।
कम उपयोग (Reduce): संसाधनों का उपयोग कम करें। (जैसे- बिजली का पंखा और बल्ब बंद करना, टपकते नल को ठीक कराना)।
पुनः उपयोग (Reuse): यह पुनर्चक्रण से बेहतर है क्योंकि इसमें ऊर्जा खर्च नहीं होती। किसी वस्तु का बार-बार इस्तेमाल करना। (जैसे- अचार की खाली प्लास्टिक की बोतल में दाल या मसाला रखना)।
पुनः प्रयोजन (Repurpose): जब कोई वस्तु अपने मूल उद्देश्य के लिए बेकार हो जाए, तो उसे किसी अन्य काम में लेना। (जैसे- टूटे हुए कप में पौधा लगाना)।
पुनर्चक्रण (Recycle): प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु की वस्तुओं को गलाकर नई वस्तुएँ बनाना। (इसके लिए ऊर्जा खर्च होती है)।
3. वन एवं वन्य जीवन (Forests and Wildlife)
वन 'जैव विविधता' (Biodiversity) के विशिष्ट स्थल (Hotspots) हैं। वनों का संरक्षण आवश्यक है।
वनों के दावेदार (Stakeholders):
वनों का प्रबंधन करते समय इन 4 समूहों को ध्यान में रखना जरूरी है:
स्थानीय लोग (Locals): जो वनों के अंदर या निकट रहते हैं और अपनी आवश्यकताओं (ईंधन, चारा, फल) के लिए वनों पर निर्भर हैं।
सरकार/वन विभाग: जिसके पास वनों का स्वामित्व है और जो इन्हें नियंत्रित करता है।
उद्योगपति (Industrialists): जो वनों से कच्चा माल (जैसे- बीड़ी के लिए तेंदू पत्ता, कागज के लिए लकड़ी) लेते हैं।
वन्य जीवन प्रेमी: जो प्रकृति और जानवरों को बचाने के लिए कार्य करते हैं।
वन संरक्षण के ऐतिहासिक उदाहरण:
खेजड़ी वृक्ष आंदोलन (अमृता देवी बिश्नोई): 1731 में राजस्थान के जोधपुर के पास खेजराली गाँव में अमृता देवी बिश्नोई ने 363 लोगों के साथ खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था।
भारत सरकार ने उनकी याद में 'अमृता देवी बिश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार' शुरू किया है।
चिपको आंदोलन (Chipko Movement): यह 1970 के दशक में गढ़वाल (हिमालय) के रेनी गाँव में शुरू हुआ। वहाँ की महिलाओं ने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें गले लगा लिया (Hugged the trees)। इसका नेतृत्व सुंदरलाल बहुगुणा ने किया।
अराबाड़ी का उदाहरण (पश्चिम बंगाल): वन अधिकारी ए.के. बनर्जी ने स्थानीय ग्रामीणों को शामिल करके 1272 हेक्टेयर बुरी तरह नष्ट हो चुके साल (Sal) के जंगल को फिर से हरा-भरा कर दिया। बदले में ग्रामीणों को रोजगार और उपज का 25% हिस्सा मिला।
4. सभी के लिए जल (Water for All)
भारत में मानसून पर निर्भरता के कारण जल प्रबंधन बहुत जरूरी है।
(A) बाँध (Dams)
नदियों पर बड़े बाँध बनाकर पानी को रोका जाता है।
लाभ: (i) सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी, (ii) विद्युत उत्पादन, (iii) शहरों को पानी की आपूर्ति।
हानियाँ/समस्याएँ:
सामाजिक: बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी विस्थापित होते हैं और बेघर हो जाते हैं।
पर्यावरण: बहुत बड़े स्तर पर वन डूब जाते हैं और जैव विविधता नष्ट होती है।
आर्थिक: जनता का बहुत अधिक पैसा लगता है लेकिन लाभ सबको समान रूप से नहीं मिलता।
उदाहरण: नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बाँध और गंगा नदी पर टिहरी बाँध का विरोध इन्हीं कारणों से हुआ।
(B) जल संग्रहण (Water Harvesting)
यह वर्षा के जल को रोकने और मिट्टी के नीचे (Groundwater) रिचार्ज करने की पुरानी तकनीक है। विभिन्न राज्यों में प्राचीन नाम:
राजस्थान: खादिन (Khadin), नाड़ी
महाराष्ट्र: बंधारस, ताल
मध्य प्रदेश/यूपी: बंधिस
बिहार: आहार और पाइन (Ahars and Pynes)
हिमाचल प्रदेश: कुल्ह (Kulhs)
तमिलनाडु: एरिस (Tanks)
🎨 [चित्र निर्देश: खादिन प्रणाली (Khadin System)]
(यह इस अध्याय का
चित्र कैसे बनाएँ (विस्तृत विधि):
ढलान (Slope): कॉपी के बाईं ओर (Left side) एक पहाड़ या ऊँची ढलान बनाएँ। इसे 'जलग्रहण क्षेत्र' (Catchment Area) लिखें। बारिश का पानी यहाँ से नीचे बहेगा।
खादिन बाँध (The Bund): ढलान के नीचे, एक लंबी दीवार (मिट्टी का बाँध) बनाएँ। यह दीवार पानी को रोकेगी।
दीवार के ऊपर एक छोटी नाली (Spillway) दिखाएँ ताकि अगर पानी ज्यादा भर जाए तो वह बाहर निकल सके।
जल भराव क्षेत्र (Saline Area): बाँध के ठीक पीछे पानी जमा हुआ दिखाएँ। यह पानी धीरे-धीरे जमीन के अंदर रिसता (Seeps) है। इसे 'खादिन' या 'फसल क्षेत्र' लिखें। यहाँ नमी रहती है जिससे फसल उगती है।
कुआँ (Shallow Dugwell): बाँध के थोड़ी दूर दाईं ओर (Right side) जमीन के नीचे एक छोटा सा कुआँ (U-shape) बनाएँ।
दिखाएँ कि खादिन का पानी जमीन के नीचे से रिसकर (तीर बनाकर
→
) इस कुएँ के जलस्तर को बढ़ा रहा है।
लेबलिंग (Labeling):
चित्र के नीचे लिखें: "परंपरागत जल संग्रहण व्यवस्था - खादिन"।
5. कोयला और पेट्रोलियम (Coal and Petroleum)
इन्हें जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) कहते हैं। ये अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं।
कोयला: 300 मिलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी के वनों के मलबे के दबने से बना।
पेट्रोलियम: समुद्र में रहने वाले जीवों के मृत शरीरों के समुद्र की तली में दबने और उच्च दाब-ताप से बना।
संरक्षण क्यों आवश्यक है? अनुमान है कि हमारे पास पेट्रोलियम केवल अगले 40 वर्षों तक और कोयला अगले 200 वर्षों तक ही बचेगा।
दहन से हानि: इनके जलने से:
कार्बन डाइऑक्साइड (
CO2
)
→
ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming)।
नाइट्रोजन और सल्फर के ऑक्साइड
→
अम्लीय वर्षा (Acid Rain)।
कार्बन मोनोऑक्साइड (
CO
)
→
जहरीली गैस।
6. प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का अवलोकन (Overview)
हमें संसाधनों का दोहन (Exploitation) करने के बजाय उनका संपोषित प्रबंधन (Sustainable Management) करना चाहिए।
संपोषित विकास (Sustainable Development) की परिभाषा: "विकास की वह प्रक्रिया जो न केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे, बल्कि भावी पीढ़ियों (आने वाले बच्चों) के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखे।"
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण टिप्स:
चित्र: "खादिन सिस्टम" का चित्र बहुत बार पूछा गया है, इसका अभ्यास करें।
तर्क: "बाँध बनाने के पक्ष और विपक्ष" पर प्रश्न आता है।
उदाहरण: अमृता देवी बिश्नोई और चिपको आंदोलन की कहानी याद रखें।
3R/5R: 5R का पूरा नाम (Refuse, Reduce, Reuse, Repurpose, Recycle) याद रखें।