देवनागरी लिपि के पेपर में स्थिरता कैसे आती है?
उत्तर-
लगभग दो शताब्दी पहले पहली बार इस लिपी के प्रकार और पुस्तक शॉपने स्टॉकहोम को बनाया गया था, इसलिए इसके आकार में स्थिरता आ गई है।
नागरी लिपि का प्रश्न उत्तर बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी प्रश्न 2.
देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं?
उत्तर-
देवनागरी लिपी में नेपाल की नेपाली (खसकुरा) और नेवाड़ी भाषाएं, मराठी भाषा की लिपी और संस्कृत एवं हिन्दी की लिपी देवनागरी है।
बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी पुस्तक समाधान प्रश्न 3.
लेखक ने किन भारतीय भाषाओं से देवनागरी का संबंध बताया है।
उत्तर-
लेखक ने गुजराती और बंगला लिपि से देवनागरी का संबंध बताया है।
कक्षा 10वीं हिंदी बिहार बोर्ड प्रश्न 4.
नंदी नागा किसे कहते हैं? किस प्रसंग में लेखक ने उसका उल्लेख किया है?
उत्तर-
विद्वानों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदीनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नादिनागरी पड़ा।
दक्षिण भारत में पोथियों के लिए नागाली लिपि का व्यवहार होता था। पूर्वी, दक्षिणभारत की यह नागाली लिपि नंदिनागरी कहलाती थी। कोंकण के शिलाहार, मन्याखेत के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव और विजयनगर के शासकों के लेख नंदिनागरी लिपि में हैं। पहला-पहला। विजयनगर के राजवंश की लिपि को ही नंदिनागरी नाम दिया गया था।
ब्राह्मी लिपी की वर्णमाला पीडीएफ बिहार बोर्ड प्रश्न 5 डाउनलोड करें।
नागी लिपी में प्रारंभिक लेख कहां से प्राप्त हुए हैं? उनका विवरण विवरण।
उत्तर-
नागाली लिपि का आरंभिक लेख हमें दक्षिण भारत से ही मिले हैं। राजराजा और राजेंद्र जैसे प्रतापी चोल राजकुमारों पर नंगी अक्षर देखने को मिलते हैं। दक्षिण भारत में नागाली लिपि के तीसरी आठवीं सदी से मिलते चले गये और उत्तर भारत में नौवीं सदी से।
कक्षा 10वीं हिंदी गोधूलि प्रश्न उत्तर प्रश्न 6.
ब्राह्मी और सिद्धम लिपी की तुलना में नागरी लिपी की मुख्य पहचान क्या है?
उत्तर-
गुप्त काल की ब्राह्मी लिपि और बाद में सिद्धम लिपि के पत्रों के सिरों पर छोटे आदि रूढ़ियाँ या छोटे ठोस तिकोन हैं। लेकिन नागाली लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके पत्रों के सिरों पर पूरी तरह से रुढ़िवादी बन जाते हैं और ये शिरो रेखाएं उतनी ही लंबी होती हैं जितनी कि साक्षात की चौड़ाई होती है।
बिहार बोर्ड हिंदी पुस्तक कक्षा 10 पीडीएफ डाउनलोड करें प्रश्न 7.
उत्तर भारत के किन शासकों के प्राचीन नागागी लेख प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
उत्तर- उत्तर भारत के इस्लामिक शासकों की मस्जिदें मखमली गंजवी के लाहौर के टकसाल में ढाले गए चाँदी के सिक्कों पर भी हम नागाली लिपी के शब्द देखते हैं। मोहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह, अकबर आदि शासकों ने भी अपनी पसंद पर नागाजी शब्द खुदवाए थे।
बिहार बोर्ड सॉल्यूशन क्लास 10 हिंदी प्रश्न 8.
नागाओं को देवनागरी क्यों कहते हैं? लेखक इस संबंध में क्या बताता है?
उत्तर-
पादतादितकम्' नामक एक नाटक से जुड़ी जानकारी है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहा जाता था। हम यह भी जानते हैं कि उत्तर भारत की स्थापत्य शैली को 'नागर शैली' कहा जाता है। मूलतः 'नागर' या नागागी शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंधित है। अकल्पनीय नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चंद्रगुप्त (द्वितीय) "विक्रमादित्य' का व्यक्तिगत नाम 'देव' था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को 'देवनगर' भी कहा जाता था। देवनगर की लिपी से उत्तर भारत की प्रमुख लिपी को बाद में देवनागरी नाम दिया गया।
बिहार बोर्ड 10वीं कक्षा की हिंदी पुस्तक पीडीएफ प्रश्न 9.
नागिन की उत्पत्ति के संबंध में लेखक क्या कहता है? पटना से नागाडी का क्या संबंध लेखक ने बताया है?
उत्तर-
इतना ध्रुवसत्य है कि यह नागागी शब्द किसी नगर अर्थात किसी बड़े शहर से संबंधित है। 'पादतादितकम्' नामक एक नाटक से जुड़ी जानकारी है कि पाटलिपुत्र के विशिष्ट पटना शहर के नाम से बुलाते थे। मूल रूप से हम यह भी जानते हैं कि उत्तर भारत की स्थापत्य को एक विशेष शैली को नागा शैली कहा जाता है। मूलतः नागा या नागागी शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंधित है। बौद्ध धर्म के अनुसार उत्तर भारत का यह बड़ा नगर निश्चित रूप से पटना में ही होगा। चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का व्यक्तिगत नाम देव था। इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को देवनगर भी कहा जाता था, जिसे देवनगर की लिपी से उत्तर भारत की प्रमुख लिपी कहा जाता था, जिसे बाद में देवनागरी नाम दिया गया।
बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी समाधान प्रश्न 10.
नागांगी लिपि सार्वदेशिक लिपि कब तक थी?
उत्तर-
ईसा की 8वीं-11वीं शताब्दी में हम नागायी लिपि को पूरे देश में व्याप्त देखते हैं। उस समय यह एक सार्वदेशिक लिपि थी।
गोधूलि भाग 2 कक्षा 10 पीडीएफ बिहार बोर्ड प्रश्न 11.
नागागी लिपि के साथ-साथ किसका जन्म होता है? इस संबंध में लेखक क्या जानकारी देता है?
उत्तर-
नागाजी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी की शुरुआत हिंदी साहित्य बैठक से हुई। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषा, मराठी, आदि जन्म ले रही थी।
बिहार बोर्ड 10वीं हिंदी प्रश्न 12.
गुर्जर प्रतिहार कौन थे?
उत्तर-
अनेक विद्वानों का मत है कि ये गुर्जर-प्रतिहार भारत से बाहर आये थे। ईसा की आठवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में अवंती प्रदेश में अपना शासन स्थापित हुआ और बाद में कनाल पर भी अधिकार कर लिया गया। मिहिर भोज, महेंद्रपाल आदि प्रतिष्ठित प्रतिहार शासक हुए। मिहिर भोज (1840-81) ई. की निकटतम पुरातनी नागाली लिपि (संस्कृत भाषा) में है।
बिहार बोर्ड कक्षा 10 वीं हिंदी प्रश्न 13.
काल-क्रम से संबंधित निबंध के आधार पर नागागी सामग्री से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करें।
उत्तर-
निबन्ध के आधार पर कालक्रम से नागागी मन्दिर से संबंधित प्रमाण इस प्रकार मिलते हैं- बारहवीं शताब्दी में राजेंद्र जैसे प्रतापी चेर राजकुमार के लीन पर नागा अक्षर दर्शन को मिलते हैं। बारहवीं सदी के केरल के शासकों के सिक्कों पर 'वीर केरलस्य' जैसे शब्द नागी लिपि में अंकित हैं। दक्षिण से प्राप्त वरगुण का पलयम ताम्रपत्र भी नागागी लिपि नौवीं शताब्दी की है। एक हजार ई. मालवा नगर के आसपास नागा लिपि का प्रयोग होता था।
विक्रमादित्य के समय पटना में देवनागरी का अर्थ है। ईसा की आठवीं से बारहवीं शताब्दी में नागाली लिपि पूरे भारत में व्याप्त थी। आठवीं सदी में दोहाकोश की तिब्बती से जो हस्तलिपि मिली है, वह नागी लिपि में है। पाँचवें चौअन ई0 में राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का सौ दानपत्र नागाली लिपि में प्राप्त हुआ है। 850 ई. जैन गणितज्ञ महावीराचार्य के गणित सार संग्रह की रचनाएँ जो नागाली लिपि में हैं।
भाषा की बात
गद्यांशों पर आधारित अर्थवर्ग-संबंधी प्रश्नोत्तरी
1. हिंदी और इसकी विभिन्न बोलियाँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं, हमारे पड़ोसी देश नेपाल की नेपाली (खसकुरा) और नेवाड़ी भाषा में भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं। मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। मराठी में सिर्फ एक अतिरिक्त अक्षर है। हमने देखा है कि प्राचीन काल में संस्कृत व प्राकृत समुद्र में यह ध्वनि थी और इसके लिए अनेक अभिलेखों में अक्षर अंकित हैं।
प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नाम लिखें।
(ख) हिंदी में कौन सी लिपि लिखी जाती है?
(छ) नेपाल में कौन सी भाषा देवनागरी में लिखी जाती है?
(घ) मराठी भाषा की लिपि क्या है?
(ङ) प्राचीन काल में किन समुद्रों में देवनागरी की ध्वनि थी?
उत्तर-
(क)पाठ का नाम-नागरा लियापा
लेखक का नाम गुणकर मुले।
(ख) हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी गई है।
(जी) नेपाल में नेपाली (ख़ुसकुरा) और नेपाली भाषाएँ देवनागरी लिपी में लिखी जाती हैं।
(घ) मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है।
(ङ) प्राचीन काल में संस्कृत एवं प्राकृत सागर में देवनागरी की ध्वनि थी।
2. ईसा की चौदहवीं-पंद्रहवीं शताब्दी के विजयनगर के शासकों ने अपनी आस्था की लिपि को नंदिनागरी कहा था। विजयनगर के राजशाही के लेख कन्नड़-तेलगु और नागागी लिपि में मिलते हैं। जानकारी में बताया गया है कि विजयनगर के राजाओं के शासनकाल में सबसे पहले पहला वेदों का लिपिबद्ध किया गया था। यह वैदिक साहित्य सत्य ही नागागी लिपि में लिखा गया होगा। बौद्धों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्र कूटों के समय महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदीनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नादिनागरी पड़ा।
प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नाम लिखें।
(ख) विजयनगर के शासकों ने अपनी स्मारक की लिपि क्या कही है?
(छ) विजयनगर के लेख किस लिपी में मिलते हैं?
(घ) प्राचीन राजवंश काल में प्रथम-पहल वेदों का लिपीकरण किया गया था?
(ङ) नंदिनागरी नामू का नागाली लिपि क्यों डाला गया?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम नागाजी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख)विजय नगर के शासकों ने अपनी डोमिनिका की लिपि को नदिनागारी कहा है।
(जी) विजय नगर के लेख नागाजी लिपी में मिलते हैं।
(घ) विजय नगर के राजशाही में प्रथम-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था।
(ङ) विद्वानों का मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदीनगरे (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नंदीनागरी पड़ा।
3. अनेक विद्वानों का मत है कि दक्षिण भाट में नागागी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्र लिपि राजा तिदुर्ग का सामगंड दानपत्र (754 ई0) है। दंतिदुर्ग ने ही राष्ट्रकूट शासन की स्थापना की थी। ये राष्ट्र कूट शासक मूलतः कर्नाटक के रहने वाले थे और मातृभाषा कन्नड़ थे; लेकिन ये खानदेश-विदर्भ में बस गए थे। डेंटिदुर्ग के बाद उनके चाचा कृष्ण (प्रथम) राष्ट्रकूटों की गद्दी पर अपवित्र। इसी कृष्ण के प्राचीन एलोरा (प्राचीन एलापुर, वेरूल) में अनुपम कैलाश मंदिर पर्वत को बनाया गया था।
कृष्ण के कुछ लेख भी मिले हैं। नौवीं सदी में अमोघवर्ष एक प्रतिष्ठित राष्ट्र राजा हुआ। इसी अमोघ वर्ष ने राष्ट्रकूट की नई राजधानी मणीखेत (मालखेड) की स्थापना की। अमोघ वर्ष के शासनकाल में ही जैन गणितज्ञ महावीराचार्य (850 ई.) ने 'गणितसार-संग्रह' की रचना की थी।
प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नाम लिखें।
(ख) अनेक विद्वान नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख किसे मानते हैं और वह किस काल का है?
(जी) राष्ट्र कूटलेखन शासन की स्थापना स्थल क्या थे?
(घ) राष्ट्र कूट शासक मूलत: कहाँ के रहनेवाले थे?
(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा क्या थी?
(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की गद्दी पर कौन अरब?
(च) प्राचीन काल में एलोरा में कैलाश मंदिर बनाया गया था?
(जे) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने प्राचीन काल में कौन से ग्रंथ की रचना की थी?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम नागाजी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख) अनेक विद्वानों का मत है कि दक्षिण भारत में नागाली लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्र लिपि राजा दंतिदुर्ग का समागंड दानपत्र 745 ई. है.
(जी) राष्ट्रकूट शासन की स्थापना दंतिदुर्ग ने की थी।
(घ) राष्ट्र कूट शासक मूलतः कर्नाटक के रहने वाले थे।
(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा कन्नड़ थी।
(च) डेंटिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की-गद्दी पर उसके चाचा कृष्ण (प्रथम) को रोक दिया गया।
(छ) कृष्ण (प्रथम) के शासनकाल में एलोरा में अनुपम कैलाश मंदिर पर्वत का निर्माण किया गया था।
(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने अमोघवर्ष के शासन काल में 'गणितसार-संग्रह' नामक ग्रंथ की रचना की?
4. महमूद गंजनवी के बाद मोहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने भी अपनी पसंद पर नागाडी शब्द खुदवाए हैं। बादशाह अकबर ने ऐसा कहा था कि जिस पर राम-सीता की चोटी है और नागाली लिपि में 'रामसी' शब्द अंकित है।
उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कान के गढ़वाल, काठियाबाद-गुजरात के किले, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखंड) के चंदेल तथा त्रिपुरा के कल्चुरि शासकों के लेख नागी लिपि में ही हैं। उत्तर भारत की इस नागाली लिपि को हम देवनागरी के नाम से जानते हैं।
प्रश्न
(क) महमूद गजनवी के बाद किन-किन शासकों ने अपनी पसंद पर नागा शब्द खुदवाए थे?
(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्कों पर कौन सा शब्द अंकित किया था और उस पर नागागी लिपि में कौन सा शब्द अंकित था
?
(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपी को हम किस लिपी के नाम से जानते हैं?
उत्तर-
(क) महमूद गंजनवी के बाद मोहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने अपनी पसंद पर नागाडी शब्द बनवाये थे।
(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्कों पर राम-सीता की प्रतिमा अंकित की थी और उस पर नागाली लिपी में 'रामसीया' शब्द अंकित है।
(छ) उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहानों के गढ़वाल, काठियावाड़-गुजरात के किले, आबू के परमार, लक्ष्मण के चंदेल और त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के कुछ नागाली लिपि में हैं।
(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।
5. गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि और बाद में सिद्धम लिपि के पत्रों के सिरों पर छोटे आदि रूढ़ियाँ या ठोस तिकोन हैं। लेकिन नागाली लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षर के शिरों पर पूरी रूढ़ियाँ बन जाती हैं और ये शिरो रेखाएँ इतनी ही लंबी रहती हैं कि उतने की - चौड़ाई होती हैं। हां, अब भी कहीं-कहीं पर कुछ मानक के अक्षर के निशान दिखाई देते हैं। दूसरी बात यह स्पष्ट है कि प्राचीन नागाओं के अक्षर आधुनिक नागारियों से मिलते-जुलते हैं और इन्हें आसानी से सीधे-से-अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।
प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नाम सूची।
(ख) ब्राह्मी लिपी और सिद्धम लिपी की शिरसंस्थाएं कै
(ग) नागी लिपी की मुख्य पहचान क्या है?
(घ) प्राचीन नागरी लिपी और आधुनिक नागरी लिपी का क्या अर्थ है?
उत्तर-
(क) पाठ-नागी लिपीलेखक- गुनाकर मुले।
(ख) गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि और बाद में सिद्धम लिपि के पत्रों के सिरों पर छोटे, आदि रूढ़ियाँ या ठोस तिकोन हैं। : (जी) नागागी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के सिरों पर पूरी तरह से रूढ़िवादिता है और ये विशिष्ट ही रहती हैं युवाओं की आकृतियों की चौड़ाई।
(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि के अक्षर बहुत-कुछ मिलते हैं, जिन्हें सम्मिलित रूप से अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।
6. इतना निश्चित है कि यह नागागी शब्द किसी नगर अर्थात बड़े शहर से संबंधित है। 'पादतादितकम्' नामक नाटक की जानकारी से पता चलता है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहा जाता था। हम यह भी जानते हैं कि उत्तर भारत की स्थापत्य शैली को 'नागर शैली' कहा जाता है। मूलतः 'नागर' या 'नागरी' शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंधित है।
अकल्पनीय नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चंद्रगुप्त (द्वितीय) "विक्रमादित्य', का व्यक्तिगत नाम 'देव' था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को 'देवनगर' भी कहा जाता था। देवनागरी' की लिपी होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपी को बाद में देवनागरी नाम दिया गया। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ। हम सप्रमाण यह नहीं बता सकते कि यह देवनागरी नाम कैसे निकला।
प्रश्न
(क) पाठ और लेख का नामोल्लाख करें।
(ख) नागागी शब्द किससे संबंधित है?
(जी) 'देवनागरी' नाम के संबंध में लेखक का क्या अनुमान है?
उत्तर-
(क) पाठ-नागी लिपीलेखक- गुनाकर मुले।
(ख)नागी शब्द किसी नगर से संबंधित है।
(जी) लेखक का अनुमान है कि यह 'नगर' पटना ही होगा। उनके अनुमान का आधार यह है कि चंद्रगुप्त (द्वितीय) "विक्रमादित्य' का व्यक्तिगत नाम 'देव' था। इसलिए गुप्तों की राजधानी को 'देवनगर' कहा जाएगा। 'देवनगर' की लिपि होने के कारण इसका नाम 'देवनागरी' पड़ा। लेखक का यह निश्चित मत नहीं है।
7. नागाली लिपि के साथ-साथ कई प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी की शुरुआत में हिंदी का साहित्य सम्मेलन शुरू हुआ। हिन्दी के आदिकवि सरहपाद (आठवीं) के 'दोहाकोश' तिब्बती से जो हस्तलिपि मिली है वह साहित्य-ग्यारहवीं शताब्दी की लिपि में लिखी गई है। नेपाल से और भारत के जैन-भंडारों से भी इस काल की बहुत सारी हस्तियाँ लिपियाँ मिलीं। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषा-मराठी, बंगला आदि जन्म ले रही थी। इस समय से इन समुद्र तटों के लेख मिलना शामिल हैं।
प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नाम सूची।
(ख) हिन्दी का आलौकिक साहित्य कब से शुरू होता है?
(छ) हिन्दी के आदिकवि कौन थे और उनकी कौन-सी पुस्तक किस लिपी में उपलब्ध है?
(घ) आधुनिक भारतीय समुद्री तट का जन्म किस काल में हुआ?
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपिलेखक-गुणाकर मुले।
(ख) हिन्दी का आलौकिक साहित्य आठवीं-नौवीं शताब्दी से है।
(छ) हिन्दी के आदिकवि आठवीं सदी के सरहपाद थे। उनकी पुस्तक 'दोहाकोश' जो सतीथ-ग्यारहवीं शताब्दी की लिपि में लिखी गई है।
(घ) आधुनिक भारतीय समुद्र में मराठी, बंगला आदि का जन्म आठवीं-नौवीं शताब्दी में हुआ था।
8. बारहवीं सदी से नागागी लिपि में प्राचीन मराठी भाषा के लेख मिलते रहते हैं। अक्ष (कुलाबां जिला) से शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक चित्र (1012 ई0) मिला है, जो संस्कृत, मराठी भाषाओं में है और इसकी लिपि नागाडी है। लेकिन दिवे आगर (रत्नागिरि जिला) ताम्रपट पूर्णतः मराठी में है। इसे मराठी का आद्यलेख माना जाता है। यह ताम्रपट 1060 ई. में नागागी लिपी में लिखा गया था। का है.
प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नाम सूची।
(ख)नागाजी लिपि के लेख कब से मिलते हैं?
(छ) गद्यांश का सारांश प्रस्तुत किया गया।
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपी। लेखक-गुणाकर मुले।
(ख)नागाजी लिपि के लेख पंद्रहवीं सदी से मिलते हैं।
(जी) बारहवीं सदी से नागागी लिपि में मराठी भाषा के लेख मिलते हैं। शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक चित्र 1012 ई का मिला हुआ है जो कि संस्कृत मराठी में है लेकिन इसकी लिपि नागा है। दिवे-आगर में प्राप्त ताम्रपत्र पूर्णतः मराठी में है। इसे नारंगी का आधलेख माना जाता है। यह ताम्रपत्र 1060 ई. का है.
9. उत्तर भारत में पहला-पहला गुर्जर-प्रतिहार पोडियम में नागाली लिपी देखने को मिलता है। विभिन्न विद्वानों का मत है कि ये गुर्जर-प्रतिहार भारत से बाहर आये थे। ईसा की आठवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में अवंती प्रदेश में अपना शासन स्थापित हुआ और बाद में कनाल पर भी अधिकार कर लिया गया। मिहिर भोज, महेंद्रपाल आदि आदरणीय प्रतिहार हुए। मि हिर भोज (840-81 ई.) की सादृश्य नागाली लिपि (संस्कृत भाषा) में है।
प्रश्न-
(क) पाठ और लेखक का नाम सूची।
(ख) उत्तर भारत में आवासीय नागारियों के लेख किसके शासन-काल में मिलते हैं?
(छ) किस गुर्जर-प्रतिहार की पूर्णि नागाली लिपी में है?
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपी। लेखक-गुणाकर मुले।
(ख) उत्तर भारत में पहले-पहले गुर्जर-प्रतिहार के दरवाजे में नागाली लिपी देखने को मिलती है। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती में और ईसा मसीह के दर्शन का अधिकार भी लिया गया था।
(छ) गुर्जर-प्रतिहार राजा मिहिर भोज (840-81 ई0) शेष परिति नागरी लिपी में है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
I. सही विकल्प चुनें –
प्रश्न 1.
गुणाकर मूले किस निबंध के रचयिता हैं?
(क) नक़ल क्यों बढ़ रहे हैं
(ख) नागागी लिपि
(ग) परंपरा का आकलन
(घ)। अविन्यों
उत्तर-
(ख) नागागी लिपी
प्रश्न 2.
देवनागरी लिपि में प्रिंट का टाइप कब बने?
(क) दो सदी पहले
(ख) दो दशक पहले
(जी) बीसवीं सदी में
(घ) 11वीं सदी में
उत्तर-
(क) दो सदी पहले
प्रश्न 3.
नागी लिपी एक सार्वदेशिक लिपी कब थी?
(क) पन्द्रहवीं शताब्दी में
(ख) ईसा पूर्व काल में
(जी) 8वीं-11वीं शताब्दी में
(जी) कभी नहीं
उत्तर-
(जी) 8वीं-11वीं शताब्दी में
प्रश्न 4.
पहले दक्षिण भारत की नागाली लिपी क्या कहलाती थी?
(क) नंदिनागरी
(ख) कोंकणी
(छ) ब्राह्मी
(घ) सिद्धम
उत्तर-
(घ) सिद्धम
प्रश्न 5.
हिन्दी के आदिकवि का नाम क्या था?
(क) विद्यापति
(ख) सरहपाद
(ग) कबीर
(घ) दैतिदुर्ग
उत्तर-
(ख) सरहपाद
रिक्त स्थान की नियुक्ति
प्रश्न 1.
हिन्दी तथा इसकी विविध बोलियाँ……..लिपि में लिखी हुई हैं।
उत्तर-
देवनागरी
प्रश्न 2.
देवनागरी में अकबर का एक सिक्का…….अंकित है।
उत्तर-
रामसी
प्रश्न 3.
चन्द्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' का व्यक्तिगत नाम…………..था।
उत्तर-
देव
प्रश्न 4.
विजयनगर के शासकों ने अपनी सरकार की रजिस्ट्री को ………….कहा है।
उत्तर-नन्दिनागरी
प्रश्न 5.
नागालैंड के आरंभिक लेख विंध्य पर्वत के…………………से ही मिलते हैं।
उत्तर-
दक्कन प्रदेश
प्रश्न 6.
बेलग्रोल में …………. का भव्य निर्माण खड़ा है।
उत्तर-
गोमटेश्वर
प्रश्न 7.
परमार शासक भोज अपने………………..के लिए प्रसिद्ध हैं।
उत्तर-
विद्यानुशासन
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
भारत में पोधियाँ कुछ समय पहले तक किस लिपी में लिखी हुई क्या थी?
उत्तर-
दक्षिण भारत में कुछ समय पहले तक पोथियाँ नागागी लिपी में लिखी हुई थी।
प्रश्न 2.
पुराण काल की लिपि क्या थी?
उत्तर-
गुप्त काल की लिपि ब्राह्मी लिपि थी।
प्रश्न 3.
बादशाह अकबर के चित्र पर कौन सा शब्द अंकित था?
उत्तर-
बादशाह अकबर के सिक्कों पर "राम-सीता" की तह और नागाली लिपि में रामसीय शब्द अंकित था।
प्रश्न 4.
राष्ट्र कूटलेख शासक मूलतः कहाँ रहने वाले थे और मातृभाषा क्या थी?
उत्तर-
राष्ट्र कूट शासक मूलतः कर्नाटक के रहने वाले थे तथा मातृभाषा कन्नड़ थी।
प्रश्न 5.
नागालैंड लिपि की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर-
नागाजी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जो जिस रूप में लिखी जाती है उसी रूप में बोली भी जाती है।
प्रश्न 6.
किन-किन शासकों के लेख नंदिनागरी लिपी में हैं?
उत्तर-
कोंकण के शिलाहार, मान्याखेत के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख देवनागरी लिपि में हैं।
प्रश्न 7.
उत्तर भारत की नागाली लिपी को हम किस लिपी के नाम से जानते हैं?
उत्तर-
उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।
प्रश्न 8.
महावीराचार्य कौन थे?
उत्तर-
महावीराचार्य अनिछवर्ष के समुद्र तट के गणितज्ञ थेफोग्स 'गणितसार-संग्रह' की रचना।
प्रश्न 9.
देवनागरी लिपि के पासपोर्ट में स्थिरता कैसे आती है?
उत्तर-
करीब दो शताब्दी पहली बार देवनागरी लिपि के टाइप बने और किताबें छपने वाले स्टॉक में। इस प्रकार ही देवनागरी लिपि के पासपोर्ट में स्थिरता आती है।
प्रश्न 10.
देवनागरी लिपी में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं?
उत्तर-
देवनागरी लिपी में मुख्यतः नेपाली, मराठी, संस्कृत, प्राकृत, हिंदी भाषाएँ लिखी जाती हैं।
प्रश्न 11.
लेखक ने भारतीय लिपियों से देवनागरी का क्या संबंध बताया है?
उत्तर-
लेखक ने देवनागरी से देवनागरी का संबंध बताया है।
प्रश्न 12.
नागालैंड लिपी के आरंभिक लेख कहाँ से प्राप्त हुए हैं? उनका विवरण विवरण।
उत्तर-
बौद्धों के अनुसार नागाली लिपि के प्रारंभिक लेख विंध्य पर्वत के नीचे के दक्कन प्रदेश से प्राप्त हैं।
प्रश्न 13.
उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागागी लेख प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
विद्वानों का विचार है कि उत्तर भारत में मिहिर भोज, महेंद्रपाल आदि गुर्जर प्रतिहार राजाओं के अभिलेखों में प्रथम-पहल नागाली लिपी के मुख प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 14.
नागरी लिपि एक सार्वदेशिक लिपि कब थी?
उत्तर-
ईसा की आठवीं-ग्यारहवीं शताब्दी में नागाली लिपि पूरे देश में व्याप्त थी। मूलतः उस समय यह एक सार्वदेशिक, लिपि थी।
नागालैंड लिपी परिचय लेखक
गुणकर मुलेका जन्म 1935 ई0 में महाराष्ट्र के अमरावती जिले का एक गाँव हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई। शिक्षा की भाषा मराठी थी। उन्होंने मध्य स्तर तक मराठी पढ़ाई भी की। फिर वे वर्धा चले गए और वहां पहुंचे उन्होंने दो साल तक नौकरी की, साथ ही अंग्रेजी और हिंदी का अध्ययन किया। फिर इलिनोइस विज्ञान वे गणित विषय में अध्ययन से लेकर एम0 ए0 तक की पढ़ाई की। सन् 2009 में मुले जी का निधन हो गया।
गुणाकर मुले के अध्ययन एवं कार्य का क्षेत्र बड़ा ही व्यापक है। उन्होंने गणित, खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरालिपिशास्त्र और प्राचीन भारत का इतिहास और संस्कृति जैसे विषयों पर प्रचुर मात्रा में लिखा है। पिछले क्लिप्स वर्षों में मुख्यत: मित्रता विषयों से संबंध 2500 से अधिक वर्ष और तीस से अधिक डॉक्युमेंट्स का प्रकाशन हो चुका है। उनकी प्रमुख कृतियों के नाम हैं - 'अक्षरों की कहानी', 'भारत: इतिहास और संस्कृति', 'प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक', 'आधुनिक भारत के महान वैज्ञानिक', 'मंडलीफ', 'महान वैज्ञानिक', 'सौर मंडल', 'सूर्य'; 'नक्षत्र-लोक', 'भारतीय लिपियों की कहानी', 'अंतरिक्ष-यात्रा', 'ब्रह्मांड परिचय', 'भारतीय विज्ञान की कहानी आदि। गुणाकर मुले की एक किताब है 'अक्षर कथा'। इस पुस्तक में उन्होंने विश्व की पुस्तकों की सभी प्रमुख पुराण लिपियों की विस्तृत जानकारी दी है।
प्रस्तुत निबंध गुणाकर मुले की पुस्तक 'भारतीय लिपियों की कहानी' से लिया गया है। इसमें हिंदी की अपनी लिपि नागी या देवनामारी के ऐतिहासिक विकास की दृष्टि स्पष्ट की गई है। यहां हमारी लिपि की प्राचीनता, व्यापकता और शाखा विस्तार का प्रवाहपूर्ण शैली में प्रामाणिक आख्यान प्रस्तुत किया गया है। टेक्नोलॉजी और दस्तावेजों से बचते हुए लेखक ने निबंधों को पेपरिल नहीं दिया है और सादगी और सहजता के साथ जरूरी ऐतिहासिक दस्तावेजों में हमारे अंदर आगे की जिज्ञासाओं के बारे में जानकारी दी गई है।
नागांगी लिपी सारांश हिंदी में
पाठ का सारांश
जिस लिपी में यह लेख छपा है, उसे नागागी या देवनागरी लिपी कहा जाता है। करीब दो सदी पहले पहली बार इस लिपी के टाइप को बनाया गया और इसमें छपने वाली किताबें लिखी गईं, इसके अक्षरांकन में स्थिरता आ गई है।
हिन्दी और इसके विविध बोल देवनागरी लिपी में लिखी हुई हैं। हमारे, पड़ोसी देश नेपाल की नेपाली और नेवाड़ी भाषाएँ भी एक जैसी लिपियों में लिखी जाती हैं। मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी लिपि के बारे में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दुनिया में जहां भी संस्कृत-प्राकृत की किताबें प्रकाशित होती हैं, वे लोकी देवनागरी लिपि में ही छपती हैं।
गुजराती लिपि देवनागरी से अधिक भिन्न नहीं है। बंगला लिपी प्राचीन नागाली लिपी की पुत्री नहीं, तो बहन एक समान है। हां, दक्षिण भारत की लिपियां वर्तमान नागाी से काफी भिन्न दिखाई देती हैं। लेकिन यह तथ्य हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि आज कुछ अलग-सी दिखाई देती है - दक्षिण भारत की ये लिपियाँ (तमिल-मलयालम और त्रि-कन्नड़) भी नागाडी की तरह प्राचीन ब्राह्मी से ही विकसित हुई हैं।
दक्षिण भारत में पोथियों के लिए नागाली लिपि का व्यवहार होता था। दक्षिण भारत की यह नागाली लिपि नंदिनागरी कहलाती थी। कोंकण के शिलाहार, मन्याखेत के राष्ट्रकूट, देवगिरि: के यादव और विजयनगर के शासकों के लेख नादिनागरी लिपि में हैं।
बारहवीं सदी में केरल के शासकों ने 'वीरकेरलस्य' जैसे शब्द नागाली लिपि में अंकित किए हैं। श्रीलंका के ऐतिहासिक बाहु, विजयबाहु (बारहवीं शताब्दी) आदि शासकों के सिक्कों पर भी नागा अक्षर देखने को मिलते हैं।
उत्तर भारत के महमूद गंजनवी, मोहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह, अकबर आदि शासकों ने सोने पर नागा शब्द खुदवाए थे। उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कान के गढ़वाल, काठियावाड़-गुजरात के जंगल, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखंड) के चंदेल और त्रिपुरा के कलचुरी शासकों के कुछ नागागी लिपि में ही हैं। उत्तर भारत की इस नागाली लिपि को हम देवनागरी के नाम से जानते हैं।
नागागी नाम की उत्पत्ति और इसके अर्थ के बारे में बौद्ध धर्म में बड़ी मान्यता है। एक मत के अनुसार गुजरात के नागा ब्राह्मणों ने सबसे पहले इस लिपी का प्रयोग किया, इसलिए इसका नाम नागाी पड़ा।
'पादतादितंकम्' नामक एक नाटक की जानकारी है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहा जाता था। हम यह भी जानते हैं कि उत्तर भारत की स्थापत्य शैली को 'नागर शैली' कहा जाता है। मूलतः 'नागर या नागागी' शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंधित है। अकल्पनीय नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना हो। चंद्रगुप्त (द्वितीय) "विक्रमादित्य' का व्यक्तिगत नाम 'देव' था। इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को 'देवनगर' भी कहा जाता था। देवनगर की लिपी को उत्तर भारत की प्रमुख लिपी से बाद में देवनागरी नाम दिया गया। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ।
कर्नाटक प्रदेश का श्रवणबेलगोल स्थान जैनों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। इस जगह से विविध समुद्र तटों और लिपियों के कई लेख मिलते हैं। एक अन्य नागाजी लेख में लिखा है चावुंडे करविय ले। ये लेख दक्षिणी शैली की नागरी लिपि में हैं।
देवगिरि के यादव राजाओं की नागरी लिपि में बहुत सारे लेख मिलते हैं। कल्याण के पश्चिमी चालुक्य नरेशों के लेख भी नागरी लिपि में हैं। उड़ीसा (कलिंग प्रदेश) में ब्राह्मी की एक विशेष शैली, कलिंग लिपि का अस्तित्व था, लेकिन गंगवंश के कुछ शासकों के लेख नागाली लिपि में भी मिलते हैं।
उत्तर भारत में पहला-पहला गुर्जर-प्रतिहार राजा के नाम नागाली लिपी दर्शन। मिहिर भोज, महेंद्रपाल आदि प्रतिष्ठित प्रतिहार शासक हुए। मिहिर भोज 1840-81 ई की समानता नागाली लिपि (संस्कृत भाषा) में है।
शब्दार्थ
पांडुलिपि:
नागालैंड के संबंधित, नागा की, शहर की,
नकल
ब्राह्मी: एक प्राचीन भारतीय लिपि, जिससे नागाडी आदि लिपियों का विकास हुआ
पथियां: किताबें, ग्रंथ
टकसाल: जहां सिक्के ढलते हैं
रामसीय: राम-सीता की
पहचान: पहचान, सत्ता
हस्त लिपि: हाथ की लिपि,
आदिलेख: अत्यंत प्राचीन प्रारंभिक लेख
विद्यानुराग: विद्या से प्रेम
