विष के दांत – Class 10 Bihar Board Hindi
प्रश्न 1: कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी के भाव और उद्देश्य को पूरी तरह व्यक्त करता है। कहानी में अमीरों की दिखावटी मर्यादा और गरीबों पर उनके अत्याचार का व्यंग्य प्रस्तुत है। महल और झोपड़ी के बच्चों की लड़ाई में महल वाले अक्सर जीतते हैं, लेकिन इस कहानी में मदन (गरीब का बच्चा) खोखा (अमीर का बच्चा) के दो-दो दाँत तोड़ देता है। यह घटना अमीरों के प्रदर्शन-प्रियता और गरीबों पर अत्याचार के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत है। कहानी का उद्देश्य यह दिखाना है कि अन्याय के विरुद्ध विद्रोह संभव है। मदन के साहस और उत्साह से समाज में बदलाव की उम्मीद का संदेश मिलता है। अतः यह शीर्षक अत्यंत सार्थक है।
प्रश्न 2: सेन साहब के परिवार में बच्चों के पालन-पोषण में लिंग आधारित भेदभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सेन साहब के परिवार में पाँच लड़कियाँ थीं – सीमा, रजनी, आलो, शेफाली, आरती, और एक लड़का – काशू (खोखा)। लड़कियों पर कड़ा अनुशासन था। उन्हें खेल-कूद और स्वतंत्रता की बहुत सीमित छूट थी। दूसरी ओर, सबसे छोटा लड़का, खोखा, बुढ़ापे में उनके लिए आशा की किरण था। इसलिए उसे विशेष दुलार और अधिक स्वतंत्रता मिली थी। घर के नियम लड़कियों पर सख्ती से लागू होते थे, लेकिन खोखा इनके अपवाद थे। इस प्रकार सेन परिवार में लड़के और लड़कियों के प्रति दोहरा व्यवहार था।
प्रश्न 3: खोखा किन मामलों में अपवाद था?
उत्तर:
खोखा सेन दंपत्ति का लाडला बेटा था। घर के नियमों, अनुशासन और खेल-कूद में वह सभी नियमों का अपवाद था। सेन साहब ने अपने बेटे की शिक्षा और विकास के लिए घर पर बढ़ई मिस्त्री से औजार चलाना सिखवाया ताकि उसके हाथ औजारों से परिचित हों। लड़कियों के लिए घर में बनाए गए नियम खोखा पर लागू नहीं होते थे।
प्रश्न 4: सेन दंपती खोखा में कैसी संभावनाएँ देखते थे और शिक्षा कैसी दी गई?
उत्तर:
सेन दंपती चाहते थे कि खोखा अपने पिता की तरह इंजीनियर बने। उसकी शिक्षा में विशेष रूप से व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल था – घर पर बढ़ई मिस्त्री द्वारा ठोंक-ठाक करना ताकि उंगलियाँ औजारों से परिचित हों। बच्चों के विकास और भविष्य की तैयारी के लिए यह व्यवस्था की गई थी।
प्रश्न 5: सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
(क) लड़कियाँ कठपुतलियाँ हैं और माता-पिता को गर्व है।
उत्तर:
सेन परिवार में लड़कियों को निर्देशों के अनुसार रहना सिखाया गया। उन्हें अनुशासन, तहजीब और तमीज में जीना आता है। वे केवल तय समय में खेलती थीं और कभी किलकारी नहीं मारती थीं। इस प्रकार लड़कियाँ कठपुतली जैसी होती हैं, क्योंकि वे केवल आदेशों पर कार्य करती हैं।
(ख) खोखा के स्वभाव के अनुसार सिद्धांत बदल गए।
उत्तर:
खोखा शरारती और स्वतंत्र स्वभाव का था। सेन दंपत्ति ने उसके स्वभाव के अनुसार नियमों में ढील दी और उसे औजारों से परिचित कराया। उनके नियम लड़कियों पर कड़ाई से लागू होते थे, लेकिन खोखा के लिए अपवाद बन गए।
(ग) गंडे, चोर और डाकू।
उत्तर:
मदन (गरीब का बेटा) साहसी और निर्भीक था। काशू पर हमला कर वह अपनी शक्ति दिखाता है। सेन साहब इसे अनुचित मानते हैं, पर मदन का साहस गरीब वर्ग के लड़कों में विद्यमान स्वतंत्रता और साहस का प्रतीक है।
(घ) हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक।
उत्तर:
खोखा अमीर घर का बच्चा है, पर गरीब बच्चों के खेल में भाग लेने की इच्छा करता है। यह सामाजिक भेदभाव और वर्ग असमानता को दर्शाता है।
प्रश्न 6: सेन साहब और उनके मित्रों के बीच बातचीत।
उत्तर:
सेन साहब के दोस्त और पत्रकार उनके ड्राइंग रूम में बैठे थे। जब उनके बेटे खोखा की तारीफ हुई, तो सेन साहब ने कहा कि वह खोखा को इंजीनियर बनाना चाहते हैं। पत्रकार मुस्कुराते हुए बोले कि बच्चे को जो कुछ भी करना है, उसे स्वतंत्रता मिले। सेन साहब इस उत्तर पर ऐंठ गए। यह व्यंग्य उनके दिखावे और बच्चों के प्रति दृष्टिकोण को उजागर करता है।
प्रश्न 7: मदन और ड्राइवर के विवाद से क्या संदेश?
उत्तर:
ड्राइवर अमीरों की सामंती मानसिकता का प्रतीक है। मदन गरीब बच्चा है और गाड़ी छूने पर उसे धक्का मिलता है। कहानीकार इस घटना के माध्यम से सामाजिक असमानता, अत्याचार और गरीब वर्ग के साहस को उजागर करते हैं।
प्रश्न 8: काशू और मदन का झगड़ा।
उत्तर:
काशू ने मदन से लटू माँगी, जिसे मदन ने देने से मना किया। झगड़ा बढ़ गया और काशू को चोट लगी। कहानीकार इस माध्यम से दिखाते हैं कि बच्चों में सामंती मानसिकता नहीं होती, वे स्वतंत्र और निर्भीक होते हैं।
प्रश्न 9: महल और झोपड़ी की लड़ाई का उदाहरण।
उत्तर:
खोखा और मदन की लड़ाई महल और झोपड़ी की लड़ाई का प्रतीक है। महल वाले अक्सर जीतते हैं, लेकिन जब झोपड़ी वाले अपने स्वाभिमान के साथ जवाब देते हैं, तब लड़ाई में विरोधाभास उत्पन्न होता है।
प्रश्न 10: गिरधर का पुत्र मदन के प्रति व्यवहार।
उत्तर:
गिरधर पहले मदन को दंडित करना चाहते थे, लेकिन जब मदन ने सेन साहब के बेटे खोखा के दाँत तोड़े, तो गिरधर गर्व और उल्लास से उसे छाती से लगा लेते हैं। यह अन्याय के खिलाफ साहस का प्रतीक है।
प्रश्न 11: सेन साहब, मदन, काशू और गिरधर का चरित्र-चित्रण।
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सेन साहब: दिखावटी, सामंती मानसिकता, अपने पुत्र खोखा पर लाड़।
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मदन: साहसी, निर्भीक, गरीब का पुत्र।
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काशू (खोखा): अमीर पुत्र, लाड़-प्यार में बिगड़ा, शरारती।
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गिरधर: सरल, निष्ठुर, मेहनती कर्मचारी, मदन का पिता।
प्रश्न 12: कहानी का नायक।
उत्तर:
कहानी का नायक मदन है। नायक वही पात्र है जो घटनाओं का संचालन करता है और सबसे प्रभावशाली होता है। मदन की निर्भीकता और साहस ने पूरी कहानी को संचालित किया।
प्रश्न 13: व्यंग्यपूर्ण स्वर के प्रमाण।
उत्तर:
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“पाँचो लड़कियाँ तो तहजीब और तमीज की तो जीती-जागती मूरत ही हैं।”
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“जैसे कोयल घोंसले में से कब उड़ जाय।”
प्रश्न 14: कहानी का सारांश।
उत्तर:
कहानी अमीर और गरीब बच्चों की सामाजिक भेदभाव, अत्याचार और साहस की कहानी है। सेन साहब का बेटा खोखा और गिरधर का बेटा मदन एक-दूसरे से झगड़ते हैं। लड़ाई, साहस, स्वतंत्रता और प्रतिशोध की घटनाएँ कहानी में उजागर हैं। मदन के साहस से दिखाया गया कि अन्याय के खिलाफ प्रतिशोध संभव है।
भाषा की बातें:
मुहावरे और वाक्य प्रयोग:
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आखों का तारा – मोहन अपने माता-पिता का आखों का तारा है।
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जीती-जागती मूरत – सेन साहब पुत्री तहजीब और तमीज की जीती-जागती मूरत है।
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किलकारी मारना – मोहन अपने मित्रों पर किलकारी मारता है।
मिश्र वाक्य उदाहरण:
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उन्हें सिखाया गया है कि ये बातें उनकी सेहत के लिए जरूरी हैं।
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सेनों का कहना था कि खोखा आखिर अपने बाप का बेटा ठहरा।
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औरत के पास एक बच्चा खड़ा था, जिसे वह रोकने की कोशिश कर रही थी।
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मैंने मना किया तो लगा कहने जा-जा।
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कुर्सियाँ लॉन में लगवा दो, जब तक हम यहाँ बैठते हैं।
वाक्य-भेद:
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मिश्र वाक्य: “इसके पहले कि पत्रकार महोदय कुछ जवाब देते, सेन साहब ने शुरू किया मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ।”
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साधारण वाक्य: “पत्रकार महोदय चुप मुस्कुराते रहे।”
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संयुक्त वाक्य: “ड्राइवर, जरा दूसरे चक्कों को भी देख लो और पंप ले आकर हवा भर दो।”
वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर:
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(ग) नलिन विलोचन शर्मा
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(ग) काशू
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(ख) गिरधर
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(घ) मनोवैज्ञानिक
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(ग) मध्य वर्ग
रिक्त स्थान भरें:
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बुढ़ापे
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सहम
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आत
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द्वन्द्व
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