MCQ उत्तर-कुंजी
- (क) 1570 ई. (अनुमानित)
- (घ) अग्रदास
- (ग) निर्गुण शाखा
- (क) दलित वर्ग
- (क) विरक्त जीवन जीते हुए
- (क) भक्त-चरित्रों की माला
रिक्त स्थान
- रामभक्त
- छप्पय
- छः
- समकालीन
- परंपरा
- भगति योग यज्ञ व्रतदान भजन बिदु तुच्छ दिखाए
अति-लघु उत्तरीय
- नाभादास
- तुलसीदास के
- अग्रदास के
- सूरदास की
- सगुणोपासक रामभक्त धारा
संक्षिप्त मॉडल उत्तर
- Q1 (कबीर की विशेषताएँ): भक्ति-रस से सरस, जाति–पाँति/वर्णाश्रम-खण्डन, भगवद्भक्ति सर्वोपरि, भक्ति-विमुख धर्म = अधर्म, प्रेम-भजन बिना तप/यज्ञ/दान/व्रत तुच्छ, हिन्दू–तुर्क सबके हित की वाणी, पक्षपातरहित सिद्धान्तवाद।
- Q2 (‘मुख देखी नाहीं भनी’): चेहरा/पहचान देखकर मनभावनी नहीं—सत्य/सिद्धान्त ही कहना। कबीर हिन्दू–मुस्लिम से ऊपर उठकर सभी के हित का सत्य बोलते हैं।
- Q3 (सूर की काव्य-विशेषताएँ): उक्ति-चातुर्य, अनुप्रास, वर्ण-अवस्था, आरम्भ से अन्त तक प्रेम-वचन का निर्वाह, तुकों का अद्भुत अर्थ, “दिव्य दृष्टि” से कृष्ण-लीला—जन्म, कर्म, गुण, रूप का प्रकाशन।
- Q4 (अर्थ स्पष्ट)
- (क) “सूर कवित्त सुनि…”: सूर का काव्य सुनकर कौन कवि है जो प्रशंसा में सिर न हिलाए!
- (ख) “भगति विमुख…”: भक्ति से विमुख जो धर्म हैं—वे अधर्म; भक्ति ही सार।
- Q5 (कबीर का गुण): पक्षपातरहित, सबके हित की भाषा; सिद्धान्तवादी समदर्शी स्वर।
- Q6 (कविता में ‘तुक’): हिन्दी छन्द का प्राण; छप्पय—6 पंक्तियों का गेय पद (रोला + उल्लाला), लय/गानयोग्यता तुक से।
- Q7 (‘कबीर कानि राखी नहीं’): षड्दर्शन/वर्णाश्रम की रूढ़ि नहीं मानी; पाखंड-भंजन, अनुभव-सत्य पर जोर।
- Q8 (भक्ति का महत्त्व): निर्गुण भक्ति का सच्चा रूप—प्रेम-भजन सर्वोपरि; पाखंड/छुआछूत/रूढ़ि-विरोध; समन्वय/सत्य/प्रेम की स्थापना।
छप्पय छन्द—1 लाइन में