सम्पूर्ण अध्याय विश्लेषण: जीव जनन कैसे करते हैं?
1. परिचय: जनन (Reproduction) क्यों आवश्यक है?
क्या यह जीवित रहने के लिए जरूरी है? नहीं। पोषण, श्वसन या उत्सर्जन की तरह यह किसी एक जीव के जीवित रहने के लिए जरूरी नहीं है। अगर कोई जनन न करे, तो भी वह मरेगा नहीं। तो फिर यह क्यों होता है? यह प्रजाति (Species) के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जरूरी है। जनन के कारण ही आज पृथ्वी पर जीवन है।
जब कोशिका विभाजित होती है, तो DNA की दो प्रतियां बनती हैं। इस प्रक्रिया में कुछ विभिन्नताएं (Variations) आ जाती हैं। यही विभिन्नताएं जैव विकास (Evolution) का आधार बनती हैं और जीवों को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने में मदद करती हैं।
2. जनन के प्रकार (Modes of Reproduction)
अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction): इसमें केवल एक ही जनक (Parent) भाग लेता है। संतान बिल्कुल अपने जनक जैसी (Clone) होती है। लैंगिक जनन (Sexual Reproduction): इसमें दो जनक (नर और मादा) भाग लेते हैं। इसमें विभिन्नताएं अधिक होती हैं।
3. एकल जीवों में प्रजनन (अलैंगिक जनन की विधियां)
(i) विखंडन (Fission)
द्विखंडन (Binary Fission): अमीबा (Amoeba) और लेिश्मानिया (Leishmania) में कोशिका बीच से दो भागों में बंट जाती है। बहुखंडन (Multiple Fission): मलेरिया परजीवी (प्लाज्मोडियम) में एक कोशिका के अंदर कई विभाजन होते हैं और एक साथ कई संतानें बनती हैं।
(ii) खंडन (Fragmentation)
उदाहरण: स्पाइरोगाइरा (Spirogyra)। यह एक शैवाल है। जब यह परिपक्व होता है, तो इसके तंतु (Filaments) छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं और हर टुकड़ा एक नया पौधा बन जाता है।
(iii) पुनरुद्भवन / पुनर्जनन (Regeneration)
उदाहरण: प्लेनेरिया (Planaria) और हाइड्रा (Hydra)। इनमें विशेष कोशिकाएं होती हैं जो विभाजन करके अंगों को दोबारा बना लेती हैं।
(iv) मुकुलन (Budding)
उदाहरण: हाइड्रा और यीस्ट (Yeast)।
(v) कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
प्राकृतिक विधि: पत्तियों द्वारा: ब्रायोफिलम (Bryophyllum) की पत्तियों के किनारों पर कलिकाएं होती हैं जो गिरकर नया पौधा बनाती हैं। तने द्वारा: आलू (आँखें), अदरक, गन्ना।
कृत्रिम विधि: कर्तन (Cutting): गुलाब। रोपण (Grafting): आम, नींबू। दाब लगाना (Layering): चमेली।
लाभ: जिन पौधों में बीज नहीं बनते (जैसे केला, गुलाब), उन्हें भी उगाया जा सकता है। इससे उगे पौधे जल्दी फल-फूल देते हैं।
(vi) बीजाणु समासंघ (Spore Formation)
उदाहरण: राइजोपस (Rhizopus) या ब्रेड मोल्ड (फफूंदी)।
4. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Plants)
बाह्यदल (Sepal): कली अवस्था में फूल की रक्षा करता है (हरा भाग)। दल / पंखुड़ी (Petal): कीटों को आकर्षित करता है (रंगीन भाग)। पुंकेसर (Stamen): यह नर जनन भाग है। इसके ऊपरी हिस्से (परागकोश/Anther) में परागकण (Pollen Grains) बनते हैं। स्त्रीकेसर (Carpel/Pistil): यह मादा जनन भाग है। इसके तीन हिस्से हैं: वर्तिकाग्र (Stigma): सबसे ऊपर का चिपचिपा भाग जो परागकण ग्रहण करता है। वर्तिका (Style): बीच की नली। अंडाशय (Ovary): सबसे नीचे का फूला हुआ भाग जिसमें बीजांड (Ovules) होते हैं।
परागण (Pollination): परागकणों का पुंकेसर से स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचना। स्व-परागण: उसी फूल में। पर-परागण: हवा, पानी या जानवरों (मधुमक्खी) द्वारा दूसरे फूल तक।
निषेचन (Fertilization): परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है और एक नली (Pollen tube) बनाता है जो अंडाशय तक जाती है। वहाँ नर युग्मक, मादा युग्मक (अंड कोशिका) से मिलता है और युग्मनज (Zygote) बनाता है। बीज और फल का निर्माण: निषेचन के बाद: बीजांड
कठोर होकर बीज (Seed) बन जाता है।अंडाशय
पककर फल (Fruit) बन जाता है।बाकी हिस्से (पंखुड़ियाँ) झड़ जाते हैं।
5. मानव में लैंगिक जनन (Human Reproduction)
(A) नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)
वृषण (Testes): ये शरीर के बाहर वृषण कोष (Scrotum) में स्थित होते हैं क्योंकि शुक्राणु बनने के लिए शरीर के तापमान से 2-3°C कम तापमान चाहिए। कार्य: शुक्राणु (Sperms) बनाना और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्राव करना।
शुक्रवाहिनी (Vas Deferens): यह नली शुक्राणुओं को वृषण से आगे ले जाती है। प्रोस्टेट और शुक्राशय ग्रंथियाँ: ये अपना स्राव डालती हैं जिससे शुक्राणु तरल माध्यम (वीर्य/Semen) में तैर सकें और उन्हें पोषण मिले। शिशन (Penis): यह मैथुन के समय शुक्राणुओं को मादा के शरीर में पहुँचाता है।
(B) मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)
अंडाशय (Ovary): उदर गुहा में दो अंडाशय होते हैं। ये अंड कोशिका (Egg) बनाते हैं और एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन स्रावित करते हैं। (हर महीने एक अंडा परिपक्व होता है)। अंडवाहिका / फैलोपियन ट्यूब: यह अंडे को गर्भाशय तक ले जाती है। निषेचन (Fertilization) यहीं होता है। गर्भाशय (Uterus): यह एक थैलीनुमा संरचना है जहाँ शिशु का विकास (9 महीने तक) होता है। ग्रीवा और योनि (Vagina): यह बाहरी रास्ता है जिससे शुक्राणु प्रवेश करते हैं और शिशु का जन्म होता है।
(C) निषेचन और भ्रूण विकास
जब शुक्राणु, योनि मार्ग से फैलोपियन ट्यूब तक पहुँचते हैं और अंडे से मिलते हैं, तो युग्मनज (Zygote) बनता है। युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) बनता है और गर्भाशय की दीवार में स्थापित (Implantation) हो जाता है। प्लेसेंटा (Placenta): यह माँ और भ्रूण के बीच की कड़ी है (एक तस्तरी जैसी संरचना)। इसके द्वारा माँ के रक्त से भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन मिलती है और भ्रूण का अपशिष्ट बाहर निकलता है। गर्भकाल: मनुष्यों में यह लगभग 9 महीने का होता है।
गर्भाशय हर महीने भ्रूण को ग्रहण करने के लिए अपनी दीवार को मोटी और रक्त-पोषक बनाता है। अगर निषेचन नहीं होता, तो यह परत टूटकर रक्त और म्यूकस के रूप में योनि से बाहर निकलती है। इसे मासिक धर्म या ऋतुस्राव कहते हैं। यह चक्र 28 दिनों का होता है।
6. जनन स्वास्थ्य (Reproductive Health)
(A) यौन संचारित रोग (STDs)
जीवाणु जनित (Bacterial): गोनोरिया (Gonorrhea), सिफलिस (Syphilis)। विषाणु जनित (Viral): मस्से (Warts), एचआईवी-एड्स (HIV-AIDS)। बचाव: कंडोम का उपयोग इन रोगों से काफी हद तक बचाता है।
(B) परिवार नियोजन / गर्भनिरोधक विधियां (Contraception)
यांत्रिक अवरोध (Barrier Method): कंडोम, डायफ्राम। यह शुक्राणु और अंडे को मिलने से रोकता है। (साइड इफेक्ट नहीं होते)। रासायनिक विधि (Chemical Method): गर्भनिरोधक गोलियां (Oral Pills)। ये हॉर्मोनल संतुलन बदल देती हैं जिससे अंडाशय से अंडा नहीं निकलता। (इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं)। IUD (कॉपर-टी): गर्भाशय में तांबे का एक यंत्र (Copper-T) लगा दिया जाता है जो शुक्राणुओं को मार देता है। शल्य क्रिया (Surgical Method): पुरुष नसबंदी (Vasectomy): शुक्रवाहिनी को काटकर बांध देना। महिला नसबंदी (Tubectomy): फैलोपियन ट्यूब को काटकर बांध देना। (यह स्थायी तरीका है)।
अध्याय का सारांश और महत्वपूर्ण बिंदु
लैंगिक जनन क्यों बेहतर है? इसमें दो जनकों के DNA मिलते हैं, जिससे विभिन्नताएं (Variations) आती हैं। विभिन्नताएं प्रजाति को कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करती हैं। भ्रूण को पोषण: प्लेसेंटा (Placenta) द्वारा मिलता है। फूल: पौधों में लैंगिक जनन का अंग है। निषेचन के बाद अंडाशय फल बनता है और बीजांड बीज बनता है। DNA: जनन की मूल इकाई DNA की कॉपी बनाना है।
महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam Oriented)
परागण: परागकणों का पुंकेसर से वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया है। यह निषेचन से पहले होती है और हवा/कीटों द्वारा होती है। निषेचन: नर युग्मक और मादा युग्मक का आपस में मिल जाना है। यह बीजांड के अंदर होता है।
अनचाहे गर्भ को रोकना। बच्चों के बीच उचित अंतर रखना। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना। यौन संचारित रोगों (STDs) से बचाव (कंडोम के उपयोग से)।