सम्पूर्ण अध्याय विश्लेषण: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) (Bihar Board Class 10 Science - Chapter 7
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सम्पूर्ण अध्याय विश्लेषण: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)
(Bihar Board Class 10 Science - Chapter 7)
1. परिचय: हमारे शरीर का 'कंट्रोल रूम'
सजीवों का शरीर एक जटिल मशीन की तरह है। जब हम गर्म वस्तु को छूते हैं, तो हमारा हाथ तुरंत पीछे हट जाता है। जब हम दौड़ते हैं, तो हमारी साँसें तेज हो जाती हैं। जब भूख लगती है, तो पेट में हलचल होती है। ये सभी क्रियाएं यह बताती हैं कि हमारे शरीर के अंगों के बीच एक तालमेल (Coordination) है। इस तालमेल को बनाए रखने का काम दो मुख्य तंत्र करते हैं:
तंत्रिका तंत्र (Nervous System): यह बिजली के तारों (Nerves) जैसा जाल है जो विद्युत आवेग (Electrical Impulse) द्वारा बहुत तेजी से संदेश भेजता है।
अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System): यह रसायनों (Hormones) द्वारा संदेश भेजता है, जो धीमी गति से लेकिन लंबे समय तक प्रभाव डालते हैं।
2. जंतुओं में तंत्रिका तंत्र (Nervous System in Animals)
जंतुओं (विशेषकर मनुष्यों) में नियंत्रण और समन्वय के लिए विशेष ऊतक होते हैं जिन्हें तंत्रिका ऊतक कहते हैं।
(A) तंत्रिका कोशिका / न्यूरॉन (Neuron)
यह तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। यह हमारे शरीर की सबसे लंबी कोशिका है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:
द्रुमिका (Dendrite): कोशिका के सिरे पर धागे जैसी संरचनाएं। यह आस-पास के वातावरण से सूचना (Information) ग्रहण करती है।
कोशिका काय (Cell Body): सूचना यहाँ विद्युत आवेग में बदल जाती है।
तंत्रिकाक्ष (Axon): यह एक लंबा तार है जो विद्युत आवेग को कोशिका काय से दूर ले जाता है।
तंत्रिका का अंतिम सिरा (Nerve Ending): यहाँ विद्युत आवेग रसायनों में बदल जाता है ताकि अगली कोशिका तक जा सके।
सिनैप्स (Synapse) क्या है? दो न्यूरॉन्स के बीच के खाली स्थान को सिनैप्स कहते हैं।
कार्य: जब विद्युत आवेग पहले न्यूरॉन के अंतिम सिरे पर पहुँचता है, तो वह कुछ रसायन (Neurotransmitter) छोड़ता है। ये रसायन सिनैप्स को पार करके अगले न्यूरॉन की द्रुमिका में नया विद्युत आवेग पैदा करते हैं। इस तरह संदेश आगे बढ़ता है।
(B) प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)
कभी-कभी हमारे शरीर को सोचने का वक्त नहीं मिलता, उसे तुरंत प्रतिक्रिया करनी पड़ती है।
परिभाषा: किसी उद्दीपन (Stimulus) के प्रति अचानक और अनैच्छिक (Involuntary) प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
उदाहरण: गर्म बर्तन छूने पर हाथ का पीछे हटना, आँखों पर तेज रोशनी पड़ने पर पलक झपकना।
प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc): इस क्रिया में संदेश मस्तिष्क (Brain) तक नहीं जाता, बल्कि मेरुरज्जु (Spinal Cord) से ही वापस आ जाता है ताकि समय बच सके।
रास्ता: ग्राही अंग (त्वचा)
→
संवेदी तंत्रिका
→
मेरुरज्जु
→
प्रेरक तंत्रिका
→
कार्यकर अंग (पेशी)।
3. मानव मस्तिष्क (Human Brain)
मस्तिष्क हमारे शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र (Central Processing Unit - CPU) है। यह कपाल (Skull) के अंदर सुरक्षित रहता है और तीन झिल्लियों (Meninges) से घिरा होता है जिनके बीच मस्तिष्क-मेरु द्रव (Cerebrospinal Fluid - CSF) भरा होता है। यह द्रव मस्तिष्क को झटकों (Shock) से बचाता है।
मस्तिष्क के तीन मुख्य भाग हैं:
(i) अग्र मस्तिष्क (Forebrain)
यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा और मुख्य सोचने वाला भाग है।
प्रमस्तिष्क (Cerebrum): यह बुद्धिमत्ता, याददाश्त, चेतना और इच्छाशक्ति का केंद्र है।
कार्य:
देखने, सुनने, सूंघने और स्वाद का पता लगाना।
ऐच्छिक पेशियों की गति का नियंत्रण।
भूख का केंद्र (जब पेट भर जाता है तो यही बताता है)।
(ii) मध्य मस्तिष्क (Midbrain)
यह अग्र और पश्च मस्तिष्क को जोड़ता है।
कार्य: सिर, गर्दन और धड़ की प्रतिवर्ती गतियां। आँखों की पुतली (Pupil) का आकार बदलना।
(iii) पश्च मस्तिष्क (Hindbrain)
यह मस्तिष्क का पिछला हिस्सा है और अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। इसके तीन भाग हैं:
अनुमस्तिष्क (Cerebellum): यह शरीर का संतुलन (Balance) और आसन (Posture) बनाए रखता है।
उदाहरण: एक सीधी रेखा में चलना, साइकिल चलाना, पेंसिल उठाना। (शराब पीने पर यही हिस्सा सबसे पहले प्रभावित होता है, जिससे व्यक्ति लड़खड़ाता है)।
मेड्यूला (Medulla): यह अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है जैसे - रक्तदाब (Blood Pressure), लार आना, उल्टी (Vomiting), और दिल की धड़कन।
पॉन्स (Pons): यह श्वसन क्रिया (Respiration) को नियमित करता है।
4. पादपों में समन्वय (Coordination in Plants)
पौधों के पास न तो दिमाग होता है और न ही तंत्रिका तंत्र। फिर भी वे पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। वे रसायनों (Hormones) का उपयोग करते हैं।
पौधों की गतियां दो प्रकार की होती हैं:
(A) वृद्धि पर आश्रित गति (Tropic Movements / अनुवर्तन)
यह गति धीमी होती है और उद्दीपन की दिशा (Direction) पर निर्भर करती है।
प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): पौधे के तने का प्रकाश की ओर मुड़ना। (ऑक्सिन हॉर्मोन के कारण)।
गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism): जड़ों का नीचे (मिट्टी की ओर) जाना और तने का ऊपर जाना।
जलानुवर्तन (Hydrotropism): जड़ों का पानी की तरफ मुड़ना।
रसायनानुवर्तन (Chemotropism): विशेष रसायनों के प्रति गति। (उदाहरण: पराग नलिका का बीजांड की ओर वृद्धि करना)।
(B) वृद्धि से मुक्त गति (Nastic Movements / अनुकुंचन)
यह गति तेज होती है और दिशा पर निर्भर नहीं करती।
उदाहरण: 'छुई-मुई' (Mimosa pudica) के पौधे की पत्तियों को छूने पर उनका सिकुड़ जाना।
कारण: पौधों की कोशिकाओं में पानी की मात्रा (Turgor pressure) बदल जाती है, जिससे कोशिकाएं फूलती या सिकुड़ती हैं और पत्तियां मुड़ जाती हैं।
5. पादप हॉर्मोन (Phytohormones)
ये विशेष रसायन हैं जो पौधों की वृद्धि, विकास और पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
हॉर्मोन
मुख्य कार्य
ऑक्सिन (Auxin)
कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाता है। तने को प्रकाश की ओर मोड़ता है।
जिबरेलिन (Gibberellin)
तने की वृद्धि में सहायक। फलों के आकार को बढ़ाता है।
साइटोकाइनिन (Cytokinin)
कोशिका विभाजन (Cell division) को प्रेरित करता है। बीजों के अंकुरण में मदद करता है।
एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid)
यह वृद्धि को रोकता है (Inhibitor)। पत्तियों का मुरझाना और झड़ना इसी के कारण होता है।
6. जंतुओं में हॉर्मोन (Hormones in Animals)
जंतुओं में रसायनों द्वारा नियंत्रण और समन्वय अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) द्वारा होता है। ये ग्रंथियां नलिकाविहीन (Ductless) होती हैं और अपने उत्पाद (हॉर्मोन) सीधे रक्त में छोड़ देती हैं।
प्रमुख मानव ग्रंथियां और उनके कार्य:
1. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland):
स्थान: मस्तिष्क के आधार में।
हॉर्मोन: वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone - GH)।
कार्य: शरीर की वृद्धि और विकास। (कमी से बौनापन, अधिकता से भीमकाय शरीर)। इसे 'मास्टर ग्रंथि' भी कहते हैं।
2. अवटु ग्रंथि (Thyroid Gland):
स्थान: गले में (श्वास नली के पास)।
हॉर्मोन: थायरॉक्सिन (Thyroxin)।
कार्य: कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय (Metabolism) का नियंत्रण।
नोट: थायरॉक्सिन बनने के लिए आयोडीन जरूरी है। आयोडीन की कमी से गला सूज जाता है, जिसे घेंघा (Goitre) रोग कहते हैं। इसीलिए आयोडाइज्ड नमक खाने की सलाह दी जाती है।
3. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland):
स्थान: दोनों किडनी (वृक्क) के ऊपर।
हॉर्मोन: एड्रीनलीन (Adrenaline)।
कार्य: इसे 'लड़ो या भागो' हॉर्मोन कहते हैं। यह डर या तनाव की स्थिति में दिल की धड़कन तेज करता है ताकि पेशियों को ज्यादा ऑक्सीजन मिले।
4. अग्न्याशय (Pancreas):
स्थान: आमाशय के नीचे।
हॉर्मोन: इंसुलिन (Insulin)।
कार्य: रक्त में शर्करा (Sugar/Glucose) के स्तर को नियंत्रित करना।
रोग: इंसुलिन की कमी से मधुमेह (Diabetes) हो जाता है। ऐसे मरीजों को इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं।
5. जनन ग्रंथियां (Gonads):
वृषण (Testes - पुरुषों में): 'टेस्टोस्टेरोन' हॉर्मोन। यह शुक्राणु उत्पादन और लड़कों में यौवन के लक्षणों (दाढ़ी-मूंछ) का नियंत्रण करता है।
अंडाशय (Ovaries - महिलाओं में): 'एस्ट्रोजन' हॉर्मोन। यह अंडोत्सर्ग और लड़कियों में यौवन के लक्षणों का नियंत्रण करता है।
7. पुनर्भरण क्रियाविधि (Feedback Mechanism)
शरीर में हॉर्मोन का स्राव एक निश्चित मात्रा में होना चाहिए। न कम, न ज्यादा। इसे नियंत्रित करने के लिए शरीर के पास एक फीडबैक सिस्टम होता है।
उदाहरण: यदि रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाता है
→
अग्न्याशय की कोशिकाएं इसे पहचान लेती हैं
→
इंसुलिन का स्राव बढ़ जाता है
→
शुगर का स्तर कम हो जाता है
→
इंसुलिन का बनना अपने आप कम हो जाता है।
अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न (Exam Oriented)
प्रश्न 1: तंत्रिका तंत्र और हॉर्मोनल तंत्र में क्या अंतर है? उत्तर:
तंत्रिका तंत्र: इसमें संदेश विद्युत आवेग (Electric impulse) के रूप में जाते हैं। यह बहुत तेज होता है लेकिन इसका प्रभाव कम समय तक रहता है। यह शरीर की हर कोशिका तक नहीं पहुँच सकता।
हॉर्मोनल तंत्र: इसमें संदेश रसायनों के माध्यम से रक्त द्वारा जाते हैं। यह धीमा होता है लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है और यह सभी कोशिकाओं तक पहुँच सकता है।
प्रश्न 2: आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है? उत्तर: अवटु ग्रंथि (Thyroid gland) को थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनाने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। यह हॉर्मोन हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के चयापचय को नियंत्रित करता है। यदि भोजन में आयोडीन की कमी हो जाए, तो हमें 'घेंघा' (Goitre) रोग हो सकता है जिसमें गला सूज जाता है।
प्रश्न 3: छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है? उत्तर:
छुई-मुई की गति स्पर्श के जवाब में होती है (Nastic movement)। यह वृद्धि से संबंधित नहीं है और बहुत तेज होती है।
प्रकाश की ओर प्ररोह की गति (Phototropism) वृद्धि के कारण होती है (Tropic movement)। यह धीमी प्रक्रिया है और ऑक्सिन हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित होती है।
प्रश्न 4: प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है? उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की कोई प्रत्यक्ष (Direct) भूमिका नहीं होती। यह क्रिया मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा नियंत्रित होती है ताकि प्रतिक्रिया तुरंत हो सके। हालांकि, क्रिया होने के बाद सूचना मस्तिष्क को भेज दी जाती है ताकि वह इसे याद रख सके (जैसे- आग छूने पर दर्द हुआ था)।