सम्पूर्ण अध्याय नोट्स: जैव प्रक्रम (Life Processes)
1. प्रस्तावना: जैव प्रक्रम क्या है?
"वे सभी प्रक्रियाएं जो संयुक्त रूप से जीव के शरीर के रख-रखाव (Maintenance) और मरम्मत का कार्य करती हैं, जैव प्रक्रम कहलाती हैं।"
पोषण (Nutrition): ऊर्जा के स्रोत (भोजन) को शरीर के अंदर लेना। श्वसन (Respiration): भोजन का विखंडन करके उससे ऊर्जा मुक्त करना। वहन / परिवहन (Transportation): बने हुए पदार्थों को शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक ले जाना। उत्सर्जन (Excretion): उपापचयी क्रियाओं (Metabolic activities) के दौरान बने हानिकारक अपशिष्टों को शरीर से बाहर निकालना।
2. पोषण (Nutrition)
(A) पोषण के प्रकार
इस प्रकार के पोषण में जीव बाहर से अकार्बनिक पदार्थ (जैसे
और जल) लेते हैं और उन्हें ऊर्जा के भंडार (कार्बोहाइड्रेट) में बदल देते हैं।उदाहरण: सभी हरे पौधे और कुछ जीवाणु। प्रक्रिया: प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)।
इसमें जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। वे भोजन के लिए पौधों या अन्य जानवरों पर निर्भर रहते हैं। यह तीन प्रकार का होता है: प्राणीसमभोजी (Holozoic): भोजन को मुँह द्वारा निगलना और शरीर के अंदर पचाना (उदा: अमीबा, मानव, गाय)। मृतजीवी (Saprotrophic): सड़े-गले पदार्थों से भोजन अवशोषित करना (उदा: कवक/Fungi, यीस्ट)। परजीवी (Parasitic): दूसरे जीव (पोषी) के शरीर के अंदर या बाहर रहकर उसे बिना मारे भोजन लेना (उदा: अमरबेल, जूँ, फीताकृमि)।
(B) पौधों में पोषण: प्रकाश संश्लेषण
अवशोषण: क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा को सोखना। रूपांतरण: प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलना और जल के अणुओं (
) का हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूटना।अपचयन: कार्बन डाइऑक्साइड (
) का कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) में बदल जाना।
कार्य: गैसों का आदान-प्रदान (
छोड़ना और लेना)।वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा अतिरिक्त जल बाहर निकालना।
नियंत्रण: द्वार कोशिकाएं (Guard Cells) पानी भरने पर फूल जाती हैं जिससे छिद्र खुल जाता है, और पानी निकलने पर सिकुड़ जाती हैं जिससे छिद्र बंद हो जाता है।
(C) अमीबा में पोषण (Nutrition in Amoeba)
अंतर्ग्रहण: अमीबा अपनी उंगली जैसी संरचना (कूटपाद/Pseudopodia) फैलाकर भोजन को घेर लेता है और खाद्य रिक्तिका (Food Vacuole) बनाता है। पाचन: खाद्य रिक्तिका के अंदर जटिल पदार्थ सरल पदार्थों में टूट जाते हैं। अवशोषण: पचा हुआ भोजन कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में मिल जाता है। बहिष्क्षेपण: बचा हुआ अपशिष्ट पदार्थ कोशिका की सतह से बाहर निकाल दिया जाता है।
(D) मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
दाँत: भोजन को छोटे टुकड़ों में पीसते हैं। जीभ: भोजन को लार के साथ मिलाती है। लार ग्रंथि (Salivary Gland): इससे 'लार' निकलती है जिसमें 'एमाइलेज' (Amylase) एंजाइम होता है। यह स्टार्च (मंड) को शर्करा (Maltose) में तोड़ देता है।
मुँह से आमाशय तक भोजन ले जाने वाली नली। इसमें क्रमाकुंचन गति (Peristaltic Movement) होती है, जिससे भोजन नीचे धकेला जाता है।
(i) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): यह भोजन के माध्यम को अम्लीय बनाता है और हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है। (ii) पेप्सिन (Pepsin): यह प्रोटीन को पचाने वाला एंजाइम है। यह केवल अम्लीय माध्यम में सक्रिय होता है। (iii) श्लेष्मा (Mucus): यह आमाशय की आंतरिक परत को एसिड से जलने से बचाती है।
यकृत (Liver): यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। यह पित्त रस (Bile Juice) बनाती है। पित्त रस का काम वसा की बड़ी गोलियों को छोटी गोलियों में तोड़ना है (इसे 'इमल्सीकरण' कहते हैं)। अग्न्याशय (Pancreas): यह अग्न्याशयिक रस छोड़ता है जिसमें: ट्रिप्सिन: प्रोटीन का पाचन करता है। लाइपेज: इमल्सीकृत वसा का पाचन करता है।
आंत्रिक रस: अंत में आंत की दीवारों से निकला रस प्रोटीन को अमीनो अम्ल में, कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में और वसा को वसा अम्ल में बदल देता है। दीर्घरोम (Villi): छोटी आँत की भीतरी दीवार पर लाखों उंगली जैसी संरचनाएं होती हैं। ये पचे हुए भोजन को अवशोषित करके रक्त में मिला देती हैं।
3. श्वसन (Respiration)
(A) ग्लूकोज का विखंडन (Breakdown of Glucose)
वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration): कहाँ: माइटोकॉन्ड्रिया में। स्थिति: ऑक्सीजन की उपस्थिति में। उत्पाद:
।
अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration): कहाँ: यीस्ट (Yeast) में। स्थिति: ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में। उत्पाद: इथेनॉल +
। (इसे किण्वन कहते हैं)।
ऑक्सीजन का अभाव: कहाँ: हमारी पेशी कोशिकाओं में (तेज दौड़ते समय)। उत्पाद: लैक्टिक अम्ल + ऊर्जा। नोट: लैक्टिक अम्ल के जमा होने से मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) होती है।
(B) मानव श्वसन तंत्र
ग्रसनी श्वास नली (Trachea): इसमें 'उपास्थि के वलय' (Cartilage rings) होते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि हवा न होने पर नली पिचक न जाए। कूपिका (Alveoli): फेफड़ों के अंदर गुब्बारे जैसी संरचनाएं। यहाँ गैसों का विनिमय होता है। ऑक्सीजन रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से फेफड़ों में आती है। हीमोग्लोबिन: मानव रक्त में लाल रंग का वर्णक (Pigment)। यह ऑक्सीजन के साथ बहुत मजबूती से जुड़ता है और उसे फेफड़ों से शरीर की हर कोशिका तक पहुँचाता है।
4. वहन / परिवहन (Transportation)
(A) मानव में परिवहन (Circulatory System)
युक्त) और अशुद्ध (बायां भाग: फुफ्फुस (Lungs) से ऑक्सीजन युक्त रक्त बाएं आलिंद में आता है, फिर बाएं निलय में जाता है, जहाँ से इसे पूरे शरीर में पंप कर दिया जाता है। दायां भाग: पूरे शरीर से अशुद्ध रक्त दाएं आलिंद में आता है, फिर दाएं निलय में जाता है, जहाँ से इसे ऑक्सीजन लेने के लिए फेफड़ों में भेज दिया जाता है। दोहरा परिसंचरण (Double Circulation): मनुष्य में रक्त को शरीर का एक चक्कर लगाने के लिए हृदय से दो बार गुजरना पड़ता है।
धमनी (Artery): ये हृदय से शुद्ध रक्त को शरीर के अंगों तक ले जाती हैं। इनकी दीवारें मोटी और लचीली होती हैं क्योंकि इसमें खून का दबाव (Pressure) अधिक होता है। (अपवाद: फुफ्फुस धमनी)। शिरा (Vein): ये शरीर के अंगों से अशुद्ध रक्त वापस हृदय तक लाती हैं। इनकी दीवारें पतली होती हैं और इनमें वाल्व (Valve) होते हैं ताकि खून पीछे न बहे। केशिकाएं (Capillaries): ये अत्यंत बारीक नलिकाएं हैं जहाँ धमनी और शिरा मिलती हैं। पदार्थों का आदान-प्रदान यहीं होता है।
प्लेटलेट्स: चोट लगने पर खून का थक्का (Clot) जमाते हैं ताकि खून बहना बंद हो जाए। लसिका (Lymph): यह एक हल्का पीला द्रव है जो अंतरकोशिकीय स्थानों में पाया जाता है। यह पची हुई वसा का वहन करता है और संक्रमण से लड़ता है।
(B) पादपों में परिवहन
यह जड़ों से पत्तियों की ओर (नीचे से ऊपर) होता है। वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पत्तियों के रंध्रों से पानी का भाप बनकर उड़ना। यह एक 'चूषण बल' (Suction pull) पैदा करता है जो पानी को ऊंचे पेड़ों तक खींचने में मदद करता है।
पत्तियों में बने भोजन (सुक्रोज) को पौधे के अन्य भागों तक ले जाना। इसे स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं। यह प्रक्रिया ऊर्जा (ATP) खर्च करके होती है और यह ऊपर-नीचे दोनों दिशाओं में हो सकती है।
5. उत्सर्जन (Excretion)
(A) मानव उत्सर्जन तंत्र
वृक्क का मुख्य कार्य रक्त को छानकर यूरिया और यूरिक अम्ल अलग करना है। वृक्काणु / नेफ्रॉन (Nephron): यह किडनी की कार्यात्मक इकाई है। एक किडनी में 10 लाख से ज्यादा नेफ्रॉन होते हैं। कार्यविधि: निस्यंदन (Filtration): अशुद्ध रक्त नेफ्रॉन में आता है जहाँ इसे उच्च दाब पर छाना जाता है। पुनरावशोषण (Reabsorption): छने हुए द्रव में कुछ काम की चीजें भी होती हैं (जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, जल)। इन्हें नलिकाओं द्वारा वापस सोख लिया जाता है। मूत्र निर्माण: अंत में जो द्रव बचता है, वह मूत्र है। इसमें यूरिया और अतिरिक्त पानी होता है।
(B) पादपों में उत्सर्जन
गैसीय अपशिष्ट: श्वसन के दौरान
और प्रकाश संश्लेषण के दौरान को रंध्रों से बाहर निकालते हैं।जल: वाष्पोत्सर्जन द्वारा अतिरिक्त पानी निकालते हैं। कोशिका रिक्तिका: कुछ अपशिष्ट पदार्थ रिक्तिकाओं (Vacuoles) में जमा होते हैं। पत्तियां: कुछ अपशिष्ट पदार्थ पत्तियों में जमा हो जाते हैं, जो अंततः गिर जाती हैं। राल और गोंद: पुराने जाइलम में अपशिष्ट पदार्थ रेजिन (Resin) और गोंद (Gum) के रूप में संचित रहते हैं।
अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ for Exams)
कार्बन डाइऑक्साइड: वायुमंडल से रंध्रों द्वारा। जल: जड़ों द्वारा मिट्टी से। सूर्य का प्रकाश: ऊर्जा के स्रोत के रूप में। क्लोरोफिल: प्रकाश अवशोषण के लिए।