अध्याय विश्लेषण: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Bihar Board Class 10 Science - Chapter 5)
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विस्तृत अध्याय विश्लेषण: तत्वों का आवर्त वर्गीकरण
(Bihar Board Class 10 Science - Chapter 5)
1. परिचय: वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी?
कल्पना कीजिए कि आप एक किराना दुकान में जाते हैं जहाँ साबुन, बिस्कुट, दाल और मसाले सब एक ही ढेर में मिले हुए हैं। क्या आपको अपनी मनचाही चीज़ मिल पाएगी? नहीं। चीजों को ढूंढना आसान बनाने के लिए दुकानदार उन्हें अलग-अलग रैक में सजाता है।
ठीक इसी तरह, 19वीं शताब्दी तक वैज्ञानिकों ने कई तत्वों (Elements) की खोज कर ली थी। (आज हमारे पास 118 तत्व हैं)। इन सभी तत्वों के गुणों को अलग-अलग याद रखना असंभव था। इसलिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पैटर्न या सिस्टम बनाने की कोशिश की जिससे समान गुण वाले तत्वों को एक साथ रखा जा सके। इसे ही आवर्त वर्गीकरण कहते हैं।
2. वर्गीकरण के शुरुआती प्रयास (Historical Attempts)
वर्गीकरण एक दिन में सफल नहीं हुआ। कई वैज्ञानिकों ने अपने-अपने सिद्धांत दिए:
(A) डोबेराइनर के त्रिक (Dobereiner’s Triads) - 1817
जर्मन वैज्ञानिक डोबेराइनर ने तीन-तीन तत्वों के समूह बनाए जिन्हें 'त्रिक' कहा गया।
नियम: त्रिक के तीनों तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) के बढ़ते क्रम में रखने पर, बीच वाले तत्व का द्रव्यमान अन्य दो तत्वों के द्रव्यमान का लगभग औसत (Average) होता है।
उदाहरण: लिथियम (
Li
), सोडियम (
Na
), पोटैशियम (
K
)।
Li
का द्रव्यमान = 6.9
K
का द्रव्यमान = 39.0
औसत =
26.9+39.0≈23.0
(जो कि
Na
का द्रव्यमान है)।
कमी (Limitation): उस समय ज्ञात सभी तत्वों को त्रिक में नहीं जमाया जा सका। डोबेराइनर केवल 3 त्रिक ही खोज पाए, इसलिए यह सिस्टम फेल हो गया।
(B) न्यूलैंड्स का अष्टक नियम (Newlands’ Law of Octaves) - 1866
अंग्रेज वैज्ञानिक न्यूलैंड्स ने तत्वों को संगीत के सुरों (सा, रे, गा, मा, पा, धा, नि) से जोड़ा।
नियम: यदि तत्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा जाए, तो हर आठवें तत्व का गुण पहले तत्व के समान होता है। (जैसे संगीत में हर आठवां सुर पहले जैसा होता है)।
उदाहरण: लिथियम के बाद आठवां तत्व सोडियम है, और दोनों के गुण समान हैं।
कमियां (Limitations):
यह नियम केवल कैल्सियम (Ca) तक ही लागू हो पाया। उसके बाद आठवें तत्व के गुण मेल नहीं खाते थे।
न्यूलैंड्स ने माना कि प्रकृति में केवल 56 तत्व हैं और भविष्य में कोई नया तत्व नहीं मिलेगा (जो गलत साबित हुआ)।
उन्होंने कुछ असमान तत्वों (जैसे कोबाल्ट और निकेल) को एक ही सुर के नीचे रख दिया।
3. मेंडलीव की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table)
रूसी वैज्ञानिक दमित्री मेंडलीव को आवर्त सारणी का जनक कहा जाता है। उन्होंने बिखरे हुए तत्वों को पहली बार एक सही सारणी में पिरोया।
मूल सिद्धांत: "तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) के आवर्त फलन होते हैं।"
आधार: उन्होंने तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान और उनके रासायनिक गुणों (हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनने वाले यौगिक) के आधार पर सजाया।
ऊर्ध्वाधर स्तंभ (Vertical Columns) = समूह (Groups)
भविष्यवाणी: मेंडलीव ने अपनी सारणी में कुछ खाली जगहें छोड़ी थीं। उन्होंने भविष्यवाणी की कि भविष्य में नए तत्व खोजे जाएंगे जो इन जगहों को भरेंगे। उन्होंने उनका नाम भी रख दिया था:
एका-बोरॉन
→
बाद में स्कैंडियम (Sc) बना।
एका-ऐलुमिनियम
→
बाद में गैलियम (Ga) बना।
एका-सिलिकॉन
→
बाद में जर्मेनियम (Ge) बना।
नोबल गैसों को स्थान: जब बाद में हीलियम, निऑन जैसी अक्रिय गैसें खोजी गईं, तो उन्हें मेंडलीव की सारणी को छेड़े बिना एक अलग समूह में रखा जा सका।
मेंडलीव की सारणी की कमियां (Demerits):
हाइड्रोजन का स्थान: हाइड्रोजन क्षार धातुओं जैसा भी व्यवहार करता है और हैलोजन जैसा भी। मेंडलीव यह तय नहीं कर पाए कि उसे कहाँ रखें।
समस्थानिक (Isotopes): समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान अलग-अलग होते हैं लेकिन रासायनिक गुण समान। मेंडलीव की सारणी (जो द्रव्यमान पर आधारित थी) में उन्हें रखने की कोई जगह नहीं थी।
अनियमित क्रम: कहीं-कहीं ज्यादा द्रव्यमान वाला तत्व (जैसे कोबाल्ट - 58.9) कम द्रव्यमान वाले तत्व (जैसे निकेल - 58.7) से पहले रख दिया गया था।
4. आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) - 1913
हेनरी मोजले (Henry Moseley) ने मेंडलीव की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया। उन्होंने सिद्ध किया कि तत्व का आधारभूत गुण उसका 'परमाणु द्रव्यमान' नहीं, बल्कि 'परमाणु संख्या' (Atomic Number - Z) है।
आधुनिक आवर्त नियम: "तत्वों के गुणधर्म उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं।"
आधुनिक सारणी की संरचना:
समूह (Groups): सारणी में 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ हैं। एक समूह के सभी तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए उनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
आवर्त (Periods): सारणी में 7 क्षैतिज पंक्तियाँ हैं। एक आवर्त में चलने पर कोशों (Shells) की संख्या समान रहती है लेकिन वैलेंस इलेक्ट्रॉन बढ़ते जाते हैं।
मेंडलीव के दोषों का निवारण:
समस्थानिक: चूंकि समस्थानिकों की परमाणु संख्या (Z) समान होती है, इसलिए उन्हें आधुनिक सारणी में एक ही स्थान पर रखा गया।
कोबाल्ट-निकेल: कोबाल्ट की परमाणु संख्या (27) निकेल (28) से कम है, इसलिए कोबाल्ट का पहले आना सही साबित हुआ, भले ही उसका वजन ज्यादा था।
5. आधुनिक आवर्त सारणी में प्रवृत्तियाँ (Trends in Modern Periodic Table)
बोर्ड परीक्षा में सबसे ज्यादा प्रश्न इसी हिस्से से आते हैं। जब हम सारणी में बाएँ से दाएँ (Left to Right) या ऊपर से नीचे (Top to Bottom) जाते हैं, तो तत्वों के गुणों में क्या बदलाव आता है?
(A) संयोजकता (Valency)
आवर्त में (L
→
R): संयोजकता पहले 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर घटकर 0 हो जाती है।
Bottom): संयोजकता समान रहती है। (जैसे समूह 1 के सभी तत्वों की संयोजकता 1 है)।
(B) परमाणु साइज / त्रिज्या (Atomic Size)
आवर्त में (L
→
R): परमाणु का आकार घटता है।
कारण: नाभिक में प्रोटॉन (Nuclear Charge) बढ़ते हैं, जो इलेक्ट्रॉनों को अंदर की ओर जोर से खींचते हैं, जिससे साइज सिकुड़ जाता है।
समूह में (Top
→
Bottom): परमाणु का आकार बढ़ता है।
कारण: हर बार एक नया कोश (Shell) जुड़ जाता है, जिससे नाभिक और बाहरी इलेक्ट्रॉन की दूरी बढ़ जाती है।
(C) धात्विक और अधात्विक गुण (Metallic & Non-metallic Properties)
धात्विक गुण: इलेक्ट्रॉन त्यागने की क्षमता।
आवर्त में (L
→
R): धात्विक गुण घटता है। (बाएँ तरफ धातुएं हैं, दाएँ तरफ अधातुएं)।
समूह में (Top
→
Bottom): धात्विक गुण बढ़ता है। (क्योंकि साइज बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन त्यागना आसान हो जाता है)।
उपधातु (Metalloids): सारणी में एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा (Zig-zag line) धातुओं को अधातुओं से अलग करती है। इस रेखा पर आने वाले तत्व (जैसे बोरोन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक) उपधातु कहलाते हैं क्योंकि इनमें दोनों के गुण होते हैं।
(D) विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity)
इलेक्ट्रॉन को अपनी ओर खींचने की क्षमता।
आवर्त में (L
→
R): बढ़ती है। (फ्लोरीन सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक है)।
समूह में (Top
→
Bottom): घटती है।
6. अध्याय का सारांश (Quick Revision Points)
डोबेराइनर: औसत द्रव्यमान वाला त्रिक नियम।
न्यूलैंड्स: संगीत के सुरों वाला अष्टक नियम (केवल Ca तक लागू)।
मेंडलीव: परमाणु द्रव्यमान पर आधारित। खाली जगहें छोड़ीं, लेकिन हाइड्रोजन और समस्थानिकों को नहीं समझा पाए।
आधुनिक (मोजले): परमाणु संख्या (Z) पर आधारित। यही आज मान्य है।
परमाणु त्रिज्या: बाएँ से दाएँ जाने पर घटती है, ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है।
धात्विक गुण: सारणी के बाईं ओर धातुएँ हैं, दाईं ओर अधातुएँ।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Exam Oriented)
प्रश्न 1: उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) को अलग समूह में क्यों रखा गया है? उत्तर: हीलियम, निऑन, आर्गन जैसी उत्कृष्ट गैसों का अष्टक (Octet) पूरा होता है। ये अत्यंत अक्रियाशील होती हैं और किसी से अभिक्रिया नहीं करतीं। इनका पता भी बहुत बाद में चला। चूँकि इनके गुण बाकी तत्वों से बिल्कुल अलग थे, इसलिए मेंडलीव की सारणी को बिना छेड़े इन्हें एक नए समूह (शून्य समूह या समूह 18) में रखा गया।
प्रश्न 2: आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्शियम (Z=20) के चारों ओर 12, 19, 21 तथा 38 परमाणु संख्या वाले तत्व स्थित हैं। इनमें से किन तत्वों के गुण कैल्शियम के समान होंगे? उत्तर: कैल्शियम (Z=20) का विन्यास 2, 8, 8, 2 है। (संयोजकता इलेक्ट्रॉन = 2)।
Z=12 (मैग्नीशियम): 2, 8, 2 (समान)
Z=19 (पोटैशियम): 2, 8, 8, 1
Z=21 (स्कैंडियम): 2, 8, 9, 2
Z=38 (स्ट्रोंशियम): 2, 8, 18, 8, 2 (समान) अतः परमाणु संख्या 12 और 38 वाले तत्वों के गुण कैल्शियम से मिलेंगे क्योंकि वे एक ही समूह के हैं और उनके बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं।
प्रश्न 3: लिथियम, सोडियम, पोटैशियम, ये सभी धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्वों के परमाणुओं में कोई समानता है? उत्तर: हाँ, ये तीनों (Li, Na, K) आधुनिक आवर्त सारणी के समूह-1 के तत्व हैं। इन सभी के सबसे बाहरी कोश में एक (1) इलेक्ट्रॉन होता है। ये सभी इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाते हैं और अत्यधिक क्रियाशील होते हैं।